
देहरादून: अंटार्कटिका की बर्फीली वीरानी में, जहां तापमान हड्डियों तक जमा देता है और इंसानी मौजूदगी बेहद दुर्लभ है, वहीं उत्तराखंड की बेटी कविता चंद ने असंभव को संभव कर दिखाया। उन्होंने दुनिया के सबसे एकांत और चुनौतीपूर्ण पर्वतों में शामिल माउंट विंसन (4,892 मीटर) पर तिरंगा फहराकर भारत का नाम वैश्विक मानचित्र पर दर्ज करा दिया।
अल्मोड़ा की पहाड़ियों से निकलकर मुंबई तक का सफर तय करने वाली कविता के लिए यह केवल एक पर्वतारोहण नहीं, बल्कि सेवन समिट्स जैसे विश्वस्तरीय लक्ष्य की ओर बढ़ाया गया आत्मविश्वास भरा कदम है। इससे पहले यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर विजय हासिल कर चुकी कविता अब दुनिया के सात महाद्वीपों की ऊंचाइयों को चुनौती दे रही हैं।
कविता का यह अभियान रोमांच से कहीं आगे की परीक्षा था। भारत से चिली के पुंटा एरेनास, वहां से यूनियन ग्लेशियर और फिर स्की-सज्जित विमान से विंसन बेस कैंप तक का सफर—हर चरण में जोखिम, धैर्य और अनुशासन की जरूरत थी। अंटार्कटिका का अनिश्चित मौसम, तेज हवाएं और माइनस तापमान इस चढ़ाई को और भी कठिन बना देते हैं।
कविता चंद की यह सफलता सिर्फ एक शिखर पर पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि हौसले अगर मजबूत हों तो दुनिया का सबसे ठंडा और कठिन कोना भी रास्ता दे देता है। उनकी यह उपलब्धि उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश की बेटियों के लिए नई उड़ान का प्रतीक बन गई है।




