
देहरादून: अर्जुन हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह मामला केवल एक आपराधिक घटना न रहकर संपत्ति, करोड़ों रुपये के लेनदेन और पारिवारिक रिश्तों के जटिल ताने-बाने में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है। हत्या के आरोप में नामजद विनोद उनियाल ने घटना से करीब दस दिन पहले, दो फरवरी को, बसंत विहार थाने में शिकायत देकर अर्जुन पर उसके चेक में फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर तीन फरवरी को प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।
अब अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने विनोद उनियाल और अर्जुन की मां बीना शर्मा सहित चार लोगों पर हत्या की आशंका जताते हुए तहरीर दी है। इस तहरीर में विनोद और बीना के बीच करीबी संबंधों का भी उल्लेख किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अर्जुन का एक और भाई है, जिसका नाम अतुल शर्मा है।
परिवार की पृष्ठभूमि भी इस पूरे विवाद को समझने में अहम है। अर्जुन और अतुल के पिता रमेश चंद्र शर्मा भारतीय सेना में कर्नल थे और करीब 38 वर्ष पहले ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। उस समय दोनों बेटे नाबालिग थे। सरकार ने परिवार के भरण-पोषण के लिए बीना शर्मा को गैस एजेंसी आवंटित की थी, जो दून स्थित पैतृक संपत्ति में पिछले 37 वर्षों से संचालित हो रही है।
इसी संपत्ति के आधार पर शर्मा परिवार ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आठ करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जिसमें अर्जुन गवाह और गारंटर के रूप में शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया है कि बीना शर्मा की विनोद उनियाल और उसकी पत्नी संगीता उनियाल से घनिष्ठ पहचान थी। आरोप है कि बीना ने विनोद को कई बार बड़ी रकम दी थी, जिसे लेकर अर्जुन और उनकी मां के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच अक्सर झगड़े की स्थिति बनती थी।
वर्ष 2024 में बीना शर्मा ने अपने बेटे अर्जुन के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद वर्ष 2025 में अर्जुन ने गैस गोदाम की संपत्ति में लेनदेन और धोखाधड़ी के आरोप लगाते हुए अपनी मां बीना शर्मा, विनोद उनियाल और संगीता उनियाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बढ़ते विवाद और कथित असुरक्षा के चलते बीना शर्मा ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर सुरक्षा की मांग की थी। अदालत के आदेश के बाद पिछले एक वर्ष से बसंत विहार थाने की एक महिला कांस्टेबल उनकी सुरक्षा में तैनात थी।





