
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी को निर्णायक बहुमत मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर बधाई दी और भारत-बांग्लादेश संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। चुनाव में युवा मतदाताओं की बड़ी भागीदारी रही और भ्रष्टाचार, महंगाई व रोजगार जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। यह परिणाम बांग्लादेश की राजनीति में नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
बीएनपी की ऐतिहासिक जीत पर पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को फोन पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान को संसदीय चुनाव में मिली निर्णायक जीत पर बधाई दी। अपने आधिकारिक संदेश में उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के आपके नेतृत्व पर विश्वास को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।
13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी का दबदबा
बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 213 सीटें जीत लीं। उसके पूर्व सहयोगी दल जमात और उसके साथियों को 71 सीटें मिलीं। इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने एक सीट जीती, जबकि अन्य दलों के खाते में 6 सीटें गईं।चुनाव में मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच देखने को मिला। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि पार्टी भंग हो चुकी है।
युवा मतदाताओं की बड़ी भागीदारी
चुनाव 299 निर्वाचन क्षेत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 127 मिलियन योग्य मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें लगभग आधे मतदाता 18 से 37 वर्ष की आयु वर्ग के थे। बड़ी संख्या में पहली बार मतदान करने वाले युवा भी इस चुनाव का हिस्सा बने।करीब 50 से 59 राजनीतिक दलों के 1755 से 1981 उम्मीदवार मैदान में उतरे। बीएनपी ने 291 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
मुद्दे और राष्ट्रीय चार्टर 2025 की परीक्षा
इस चुनाव में भ्रष्टाचार, मुद्रास्फीति, रोजगार और आर्थिक विकास प्रमुख मुद्दे रहे। बीएनपी और जमात के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही।साथ ही एक समानांतर मतदान में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा प्रस्तावित शासन सुधारों के लिए 84 सूत्री ‘नेशनल चार्टर 2025’ का भी परीक्षण किया गया, जिसे राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





