
मेरठ में पाकिस्तान की रहने वाली सबा मसूद उर्फ नाजिया को पुलिस ने फर्जी दस्तावेज और दो नाम से वोटर कार्ड बनवाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। महिला 1988 में शादी के बाद भारत आई थी और 37 साल से यहां रह रही थी। पुलिस जांच में उसकी पहचान से जुड़े कई संदिग्ध तथ्य सामने आए हैं और विदेशी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। मामले में आईएसआई से संबंध होने का शक भी जताया गया है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मेरठ : पाकिस्तानी मूल की महिला सबा मसूद उर्फ नाजिया को पुलिस ने 23 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। महिला पर आरोप है कि उसने भारत में रहने के दौरान फर्जी दस्तावेज बनवाकर अपनी पहचान छिपाई और दो अलग-अलग नामों से वोटर कार्ड बनवाए।यह कार्रवाई देहली गेट थाना पुलिस ने खुफिया विभाग के साथ मिलकर की। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की और उसके दस्तावेजों की जांच की, जिसमें कई संदिग्ध तथ्य सामने आए।
शादी के बाद पाकिस्तान से भारत आई थी महिला
प्राथमिकी के अनुसार, मेरठ की नादिर अली बिल्डिंग निवासी बैंड कारोबारी फरहत मसूद ने वर्ष 1988 में लाहौर जाकर सबा मसूद उर्फ नाजिया से निकाह किया था। निकाह के बाद वह लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत आ गई और यहीं रहने लगी।
दंपती के तीन बच्चे हुए, जिनमें दो का जन्म भारत में हुआ। जबकि 1993 में पाकिस्तान जाने के दौरान महिला ने अपनी बेटी एमन फरहत को जन्म दिया और बाद में उसे पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लेकर आई। आरोप है कि बाद में बेटी का दाखिला मेरठ के एक प्रतिष्ठित स्कूल में करा दिया गया।
दो नाम से बनवाए वोटर कार्ड, बढ़ सकती हैं विदेशी अधिनियम की धाराएं
पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में महिला के दो अलग-अलग नाम दर्ज थे। इसके अलावा उसने बिना सूचना दिए सहारनपुर सहित कई स्थानों की यात्रा की थी।एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि जांच में महिला के खिलाफ मिले साक्ष्यों के आधार पर विदेशी अधिनियम की धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी। हालांकि अभी तक फर्जी पासपोर्ट मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
आईएसआई से संबंध होने का भी शक
शिकायतकर्ता महिला ने अपनी प्राथमिकी में आरोपी महिला के पिता पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने का भी शक जताया है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।वहीं आरोपी पक्ष का कहना है कि यह मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं में मामला दर्ज किया है:
धारा 318 (4) — धोखाधड़ी, अधिकतम 7 साल की सजा
धारा 336 (3) — जालसाजी कर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेरफेर, अधिकतम 7 साल की सजा
धारा 338 — फर्जी दस्तावेज बनाना, 10 साल से उम्रकैद तक की सजा





