
दिल्ली : पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक Arvind Kejriwal ने बुधवार को एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राजधानी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की विदेश नीति और पश्चिम एशिया के संघर्ष पर सरकार के रुख के कारण देश को ईंधन संकट का सामना करना पड़ रहा है।
केजरीवाल ने कहा कि देश इस समय गंभीर स्थिति से गुजर रहा है क्योंकि घरेलू रसोई और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस की भारी कमी देखी जा रही है। उनके अनुसार एलपीजी उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है, जबकि देश में इस्तेमाल होने वाली करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात के जरिए आती है। उन्होंने दावा किया कि इस आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा Strait of Hormuz से होकर आता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उस मार्ग से आने वाली आपूर्ति में लगभग 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
आप संयोजक ने कहा कि यह स्थिति पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का परिणाम है। उनके मुताबिक Iran ने अपने नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, जिससे भारत को गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को कमजोर करने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर Donald Trump और Benjamin Netanyahu के साथ खड़े होकर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि युद्ध शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री का इज़राइल जाना और वहां नेतन्याहू से मुलाकात करना क्यों जरूरी था। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें यह कहते हुए शर्म आती है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री ट्रंप के दबाव में काम कर रहे हैं और भारत को अमेरिका की नीति के अनुरूप ढाल रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर रुख बदला और व्यापारिक मामलों में भी कई फैसले अमेरिका के पक्ष में लिए गए। केजरीवाल ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को लगता है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण देश की स्थिति कमजोर हो रही है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
उधर हाल के घटनाक्रमों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने 25 और 26 फरवरी को इज़राइल का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से मुलाकात की थी। इसके बाद 28 फरवरी को Israel और United States ने Iran पर संयुक्त हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई। इसके जवाब में तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया।






