
देहरादून : एक अहम खबर सामने आई है, जहां आगामी पर्यटन सीजन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तैयारियों को तेज कर दिया है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अपने कैंप कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें देहरादून–मसूरी मार्ग पर स्थित वैली ब्रिज की वर्तमान स्थिति और भविष्य की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में वन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य आने वाले महीनों में बढ़ने वाले पर्यटक दबाव को देखते हुए यातायात को सुचारु बनाए रखना और किसी भी संभावित अव्यवस्था से पहले ही निपटने की रणनीति तैयार करना था। गौरतलब है कि हर साल अप्रैल से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन में मसूरी और देहरादून के बीच यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे जाम और असुविधा जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रस्तावित नए स्थायी पुल के निर्माण से पहले अस्थायी (टेंपरेरी) वैली ब्रिज का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते वैकल्पिक पुल की व्यवस्था नहीं की गई, तो पर्यटन सीजन के दौरान यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोक निर्माण विभाग और वन विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी आवश्यक अनुमतियों और प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाए और निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि वैली ब्रिज के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। साथ ही, ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए वैकल्पिक मार्गों और संकेतक बोर्डों की व्यवस्था पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर डीएफओ मसूरी अमित कंवर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार समेत कई अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने मंत्री को आश्वासन दिया कि दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए समयबद्ध तरीके से कार्य को पूरा किया जाएगा।
कुल मिलाकर, सरकार इस बार पर्यटन सीजन को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है और पहले से ही आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने में जुटी हुई है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े और उत्तराखंड की छवि एक बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में और मजबूत हो सके।




