
कानपुर: अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के खुलासे के बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। शुरुआती कार्रवाई में जिन अस्पतालों पर छापेमारी की गई थी, अब उनके अलावा शहर के कई अन्य निजी अस्पताल और नर्सिंग होम भी जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दर्जनों संस्थानों की सूची तैयार की है, जहां दस्तावेजों और इलाज से जुड़ी प्रक्रियाओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कई अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं जरूरी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन का अभाव मिला है तो कहीं मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड अधूरे पाए गए हैं। अधिकारियों को संदेह है कि इन खामियों का फायदा उठाकर अवैध ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर अपराध को अंजाम दिया जाता रहा हो सकता है।
जांच एजेंसियां अब उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भूमिका भी खंगाल रही हैं, जो अलग-अलग अस्पतालों से जुड़े हुए हैं और संदिग्ध मामलों में उनकी मौजूदगी सामने आई है। विशेष रूप से उन विशेषज्ञों की सूची तैयार की जा रही है, जो किडनी से जुड़े इलाज या सर्जरी में शामिल रहते हैं। ऐसे डॉक्टरों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं वे अनजाने में या जानबूझकर इस नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं बने।
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि कई मामलों में मरीजों और डोनर्स को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता था, ताकि किसी एक जगह पर पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड न मिल सके। इसी कड़ी में अब एंबुलेंस सेवाओं और मरीजों के ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
जांच के बढ़ते दायरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। बिना अनुमति संचालित हो रहे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें सीलिंग से लेकर लाइसेंस निरस्त करने तक के कदम शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के अवैध रैकेट पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।





