
अल्मोड़ा : विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने पड़ोलिया क्षेत्र में पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियों) पर आधारित बायोमास प्रोडक्शन यूनिट का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, स्थानीय ग्रामीणों और बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। उद्घाटन के बाद मंत्री ने यूनिट का निरीक्षण भी किया और इसके संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
कैबिनेट मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से रोजगार के सीमित अवसर एक बड़ी चुनौती रहे हैं, लेकिन इस प्रकार की पहल से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह यूनिट आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए आय का एक स्थायी स्रोत बन सकती है। जो महिलाएं जंगलों से पिरूल एकत्रित कर इसे उद्योगों तक पहुंचाएंगी, उन्हें इसका उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए राज्य सरकार पहले ही एक स्पष्ट नीति तैयार कर चुकी है। इस नीति के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने आगे कहा कि पिरूल का उपयोग केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका पर्यावरणीय महत्व भी बेहद बड़ा है। उत्तराखंड के जंगलों में हर साल लगने वाली आग एक गंभीर समस्या रही है, जिसमें चीड़ के सूखे पत्ते यानी पिरूल मुख्य कारण बनते हैं। ऐसे में यदि इन्हीं पत्तों को इकट्ठा कर ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किया जाए, तो एक ओर जहां जंगलों में आग की घटनाओं में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा का स्रोत भी विकसित होगा। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को ऊर्जा के नए विकल्प मिलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
अपने संबोधन के दौरान कैबिनेट मंत्री ने महिलाओं से जुड़ी नीतियों और उनके अधिकारों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा, लेकिन अब समय बदल चुका है और महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में आधी आबादी अपने अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए सही निर्णय लेगी और विपक्षी दलों को इसका करारा जवाब देगी।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताया। अनिल सिंह शाही, मंडल अध्यक्ष सुंदर सिंह राणा, प्लांट के निदेशक बालम भाकुनी, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी, पवन भाकुनी सहित कई गणमान्य लोग इस अवसर पर उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि यदि इस प्रकार की परियोजनाओं को निरंतर बढ़ावा दिया जाए, तो पहाड़ों से पलायन की समस्या को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्थानीय लोगों में इस यूनिट को लेकर उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों का मानना है कि इससे न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान होगा। महिलाओं ने विशेष रूप से इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि अब उन्हें अपने गांव के पास ही काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकेंगी। इस तरह पिरूल आधारित बायोमास यूनिट क्षेत्र में विकास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण—तीनों के संतुलन का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है।





