
नई दिल्ली: नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मेडिकल छात्रा आकांक्षा की मौत का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का खामियाजा देश के युवा भुगत रहे हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि आकांक्षा का सपना डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना था। उन्होंने कहा कि आकांक्षा के किसान पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख रुपये का कर्ज लिया और नागपुर में खाना बनाने का काम तक किया, ताकि वह अपनी बेटी की कोचिंग का खर्च उठा सकें।
कांग्रेस नेता ने कहा कि एक पिता ने अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया, लेकिन कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आकांक्षा की मौत हो गई। राहुल गांधी ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और विफल व्यवस्था का परिणाम बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक केवल समितियां गठित करने, तबादले करने और जांच कराने तक ही कार्रवाई सीमित रही है, जबकि न तो सुधार दिखाई दे रहे हैं और न ही न्याय।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस तरह नुकसान पहुंचा है, उसकी कीमत देश की पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।
उधर, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा। बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक का कारोबार हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का माध्यम बन चुका है।
संजय सिंह ने कहा कि देश के छात्र मानसिक दबाव में हैं और कई युवा आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, लेकिन पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर चर्चा करना भी मुश्किल बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों छात्रों को उठाना पड़ रहा है, जो कड़ी मेहनत और ईमानदारी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।






