
देहरादून : आयुध निर्माणी कंपनियां भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक विजन सिस्टम और विशेष कैमरे तैयार कर रही हैं, जो युद्ध के मैदान में सैनिकों के लिए ‘तीसरी आंख’ साबित हो रहे हैं। दिन और रात दोनों परिस्थितियों में काम करने वाले ये स्वदेशी कैमरे वैश्विक बाजार की तुलना में कम लागत पर उपलब्ध हैं और सेना की युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2001 में रूस से आए टी-90 टैंकों के भारतीयकरण में इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (आईओएल) की अहम भूमिका रही है। संस्थान ने टी-90 टैंकों को अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और टीकेएन-4एस विजन तकनीक से लैस किया, जिसे अब और उन्नत बनाते हुए सीटीआई-90 तकनीक भी प्रदान की जा चुकी है।
स्वदेशी तकनीक से सुसज्जित ‘भीष्म’ नामक टी-90 टैंक में तैनात सैनिक बिना बाहर निकले 10 किलोमीटर तक स्पष्ट रूप से निगरानी कर सकते हैं। टैंक चालक अंदर बैठे-बैठे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ सटीक निशाना भी साध सकता है।
इन आधुनिक कैमरों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे रात में दृश्यता को 20 हजार गुना तक बढ़ाने में सक्षम हैं। इससे सैनिक तीन सेकंड से भी कम समय में दुश्मन की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं।
देहरादून की आयुध निर्माणी इकाइयों में विकसित ये उपकरण केवल भारतीय सेना ही नहीं, बल्कि विभिन्न अर्धसैनिक बलों द्वारा भी व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे हैं। स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भरता और सैन्य ताकत को नई मजबूती प्रदान कर रही है।







