
अयोध्या: राम मंदिर से जुड़े प्रकरण में गठित एसआईटी की प्रारंभिक जांच में किसी भी पदाधिकारी या कर्मचारी को राहत नहीं मिली है। जांच के शुरुआती निष्कर्षों में मंदिर प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के संकेत मिलने का दावा किया गया है। सूत्रों के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण कार्य से जुड़े गोपाल राव के नाम भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। हालांकि कमीशन और जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सभी की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई थीं, जिनमें एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा भी शामिल थी। शासन स्तर पर संज्ञान लेने के बाद मामला दर्ज कराया गया। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ-साथ निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों की भूमिका से संबंधित तथ्य भी दर्ज किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी कहा गया है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को फिलहाल क्लीनचिट नहीं दी गई है। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार चढ़ावे की गणना के दौरान करोड़ों रुपये की कथित चोरी को प्रबंधन और निगरानी तंत्र की विफलता माना गया है। इसी आधार पर संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। हालांकि एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए अंतिम निष्कर्षों के लिए पूरी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
चढ़ावा चोरी प्रकरण की विवेचना सीओ अयोध्या की निगरानी में चल रही है। जांच टीम आरोपियों के बैंक खातों की पड़ताल करने के साथ-साथ गणना प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक कर्मचारी और अधिकारी की भूमिका की जांच कर रही है। यदि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में अनिल मिश्रा पर कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोप लगाए गए हैं, जबकि चंपत राय पर जमीन खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं के आरोपों की जांच की जा रही है। वहीं गोपाल राव की भूमिका भी विभिन्न आरोपों के चलते जांच के दायरे में बनी हुई है। एसआईटी कई गवाहों के बयान दर्ज कर चुकी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।





