
देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम ने सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। निगम जल्द ही उत्तराखंड से दिल्ली मार्ग पर हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली बसों का संचालन शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए आवश्यक ढांचागत तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं और प्रस्ताव को जल्द निगम बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा।
दरअसल, नौ से 11 जुलाई के बीच गुजरात के गांधीनगर में आयोजित बस एवं कार ओनर एसोसिएशन ऑफ इंडिया की प्रदर्शनी में उत्तराखंड परिवहन निगम के संचालन और तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया। प्रदर्शनी में परिवहन क्षेत्र से जुड़े कई अत्याधुनिक मॉडल और तकनीकें प्रस्तुत की गईं। इनमें से दो प्रमुख मॉडलों को उत्तराखंड में लागू करने की योजना बनाई गई है।
अधिकारियों के अनुसार, देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर हाइड्रोजन गैस की उपलब्धता को देखते हुए शुरुआत में इसी रूट पर हाइड्रोजन बसें चलाई जाएंगी। इन बसों के संचालन से प्रदूषण उत्सर्जन लगभग शून्य होगा। साथ ही परिचालन लागत में कमी आने पर यात्रियों को किराये में भी राहत मिलने की संभावना है। परियोजना के लिए बजट का आकलन कर राज्य सरकार से वित्तीय सहायता मांगी जाएगी।
इसके अलावा, रोडवेज बसों की निगरानी के लिए प्रदेश में एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से प्रत्येक बस की लोकेशन, गति और संचालन संबंधी गतिविधियों पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी। यह भी पता लगाया जा सकेगा कि बसें मार्ग में कहां और कितनी देर रुकीं तथा एक्सप्रेस बसों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
यात्रियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए परिवहन निगम 24 घंटे संचालित होने वाला एक टोल-फ्री नंबर भी जारी करेगा। वर्तमान में शिकायतों के लिए डिपो अधिकारियों के नंबर उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन अवकाश या कार्यालय समय समाप्त होने के बाद संपर्क में दिक्कत आती है। नई व्यवस्था के तहत कमांड सेंटर में तैनात कर्मचारी चौबीसों घंटे शिकायतें दर्ज कर उनका निस्तारण सुनिश्चित करेंगे।
परिवहन निगम के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह ने बताया कि हाइड्रोजन बसों के मॉडल को योजना में शामिल किया गया है। प्रारंभिक चरण में इन बसों को दिल्ली रूट पर संचालित किया जाएगा और बाद में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार किया जाएगा।






