
असम : भारी बारिश के चलते राज्य के कई इलाके जलमग्न हैं। बीते 24 घंटों में 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि लाखों लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी ASDMA के मुताबिक, राज्य के 11 ज़िले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। शिवसागर, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजई, जोरहाट, कामरूप, कामरूप मेट्रो, कार्बी आंगलोंग और नागांव में कुल 6 लाख 53 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। पिछले 24 घंटों में 10 लोगों की मौत के बाद इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
सबसे ज़्यादा असर शिवसागर ज़िले में देखा जा रहा है, जहां करीब 4 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। चराइदेव में 1 लाख 11 हजार और जोरहाट में 97 हजार से अधिक लोग मुश्किल हालात में हैं। राज्य के 939 गांव पानी में डूब गए हैं, जबकि लगभग 24,900 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। राहत के लिए प्रशासन ने 10 ज़िलों में 487 राहत शिविर और वितरण केंद्र शुरू किए हैं, जहां 24 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित रखा गया है।
सेना, NDRF, SDRF, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग और शिवसागर से 8,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। वहीं कई नदियां—बुरीडीहिंग, दिखौ, धनसिरी, कुशियारा और दिसंग—खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में खतरा लगातार बना हुआ है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अगले चार दिनों तक येलो अलर्ट भी प्रभावी रहेगा। इस दौरान कई इलाकों में भारी बारिश, तेज़ आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
इस बीच असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की और सभी विभागों को राहत एवं बहाली के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, चिकित्सा सेवाओं और आवश्यक सुविधाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया। साथ ही NDRF, सेना और वायु सेना से भी राहत कार्यों में सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
फिलहाल असम में बाढ़ से राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मौसम विभाग की चेतावनी और लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है, जबकि लाखों लोग सुरक्षित ठिकानों और राहत सहायता पर निर्भर हैं।





