
पुलिस कार्रवाई के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आज देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। संगठन ने छात्र संघों से अपील की है कि वे अपने-अपने जिलों में एकत्र होकर छात्रों की मांगों को सार्वजनिक रूप से पढ़ें और स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेकर प्रदर्शन का आयोजन करें।
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों ने जंतर-मंतर पर बातचीत के लिए आने से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर बातचीत के लिए बुलाया गया, लेकिन संगठन ने इस प्रस्ताव पर अपनी दो शर्तें रखी हैं।
रांका के अनुसार, पहली शर्त यह है कि बातचीत जेपी नड्डा के आवास पर नहीं बल्कि जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर हो। दूसरी शर्त के तहत सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि छात्रों की मांगें कब तक पूरी की जाएंगी और इस संबंध में ठोस आश्वासन देना होगा।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि देश के युवाओं का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लिखा कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं तथा विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि संगठन इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है और उससे नीचे के स्तर पर किसी भी प्रतिनिधि से बातचीत नहीं करेगा।
उधर, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा के साथ-साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए।
दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों को लेकर दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वह जंतर-मंतर क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात थे। उनके अनुसार, शाम के समय संसद मार्ग की ओर जाते हुए उन्होंने देखा कि पुलिसकर्मियों पर पानी की बोतलें फेंकी जा रही थीं और पुलिस विरोधी नारे लगाए जा रहे थे।
एसीपी भगत ने कहा कि स्थिति तब बिगड़ गई जब भीड़ ने एक घायल पुलिसकर्मी को घेर लिया। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने उसे सुरक्षित निकालने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ लगातार आक्रामक होती गई और पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। पुलिस का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है और पूरे मामले की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है, जबकि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं।







