
जोधपुर : मिल्क मेन कॉलोनी, पाल रोड स्थित श्री साईनाथ बाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं को कृमि संक्रमण से बचाव, स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों के स्वस्थ जीवन, बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत एल्बेंडाजोल की दवा दी गई। संस्था प्रधान प्रेम शंकर तिवारी ने हमारे संवाददाता सुनील कुमार माथुर को बताया कि 3 वर्ष से 19 वर्ष तक की आयु के छात्र-छात्राओ को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कृमिनाशक दवा दी गई। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल पेट में मौजूद कृमियों को समाप्त करने के लिए दी जाती है और बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से इसका विशेष महत्व है।
संस्था प्रधान प्रेम शंकर तिवारी ने कहा कि बच्चों के समुचित शारीरिक विकास और स्वस्थ जीवन के लिए उन्हें कृमि संक्रमण से बचाना आवश्यक है। पेट में कृमि होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा कमजोरी, भूख में कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में समय-समय पर कृमिनाशक दवा का सेवन और स्वच्छता संबंधी आदतों को अपनाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता ही स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी है। बच्चों को भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोने, साफ-सफाई रखने, स्वच्छ पानी पीने तथा अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
विद्यालय परिवार ने बच्चों को यह भी समझाया कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहकर अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। विद्यार्थियों से स्वच्छ आदतों को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें कृमि संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी देना रहा।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जागरूकता का संदेश दिया गया। विद्यालय परिवार ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें और उन्हें साफ-सफाई तथा स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करें।






