
देहरादून: एमबीबीएस दाखिलों में फर्जी प्रमाणपत्र लगाए जाने के मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जन सेवा केंद्रों की जांच तेज कर दी है। गुरुवार को तहसीलदार सुरेंद्र सिंह और ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने शहर के कई जन सेवा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने पर चार केंद्रों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया, जबकि तीन केंद्रों से कंप्यूटर, सीपीयू और अन्य उपकरण कब्जे में लिए गए हैं। वहीं, तीन केंद्र संचालकों की आईडी निरस्त करने की संस्तुति की गई है।
प्रशासन की जांच में कहीं रजिस्टर अपडेट नहीं मिला तो कहीं रजिस्टर रखा ही नहीं गया था। कुछ केंद्रों पर संचालक की जगह दूसरे लोग काम करते पाए गए। इसके अलावा कई केंद्रों से मूल दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई है। प्रशासन ऐसे केंद्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है।
सबसे पहले प्रशासन की टीम कलेक्ट्रेट के पास शादमान के जन सेवा केंद्र पर पहुंची। यहां रजिस्टर अपडेट नहीं मिला। केंद्र से कई मूल दस्तावेज भी बरामद किए गए, जिन्हें प्रशासन ने कब्जे में ले लिया। निरीक्षण के दौरान शादमान के स्थान पर एक अन्य महिला काम करती मिली। अनियमितताओं को देखते हुए केंद्र को तत्काल सील कर दिया गया और उसका सीपीयू भी कब्जे में लिया गया।
इसके बाद कलेक्ट्रेट के पास स्थित हनी रमन, करन वर्मा और प्राची कौशिक के जन सेवा केंद्रों का निरीक्षण किया गया। यहां भी कई अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद तीनों केंद्रों को सील कर दिया गया। इनमें से दो केंद्रों पर रजिस्टर ही नहीं मिले।
प्रशासन ने तहसील के पास पूनम खन्ना और कलेक्ट्रेट के पास करन वर्मा के केंद्रों से सीपीयू कब्जे में लिए हैं। वहीं, तहसील के पास पारुल बंसल और कलेक्ट्रेट के पास प्राची कौशिक के केंद्रों से लैपटॉप भी जब्त किए गए। इन केंद्रों पर भी जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं।
पवन फर्स्वाण के जन सेवा केंद्र के निरीक्षण में भी प्रशासन को कई मूल दस्तावेज मिले। साथ ही रजिस्टर अपडेट नहीं था। प्रशासन ने पूनम खन्ना और पारुल बंसल के जन सेवा केंद्रों की आईडी निरस्त करने की संस्तुति की है।
निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली का भी आरोप
एसडीएम सदर ने बताया कि कई जन सेवा केंद्रों के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। औचक निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूली जा रही थी। उदाहरण के तौर पर 50 रुपये निर्धारित शुल्क वाली सेवा के लिए जल्दी काम कराने का झांसा देकर 100 रुपये तक वसूले जा रहे थे। कई अन्य सेवाओं में भी निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि लिए जाने की शिकायत और अनियमितता सामने आई।
लापरवाही और अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं
एसडीएम सदर डॉ. अपूर्वा सिंह ने कहा कि जन सेवा केंद्र आमजन को विभिन्न सरकारी सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किए जाते हैं। ऐसे केंद्रों पर निर्धारित मानकों का पालन किया जाना जरूरी है। आमजन से जुड़ी सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




