
पौड़ी : चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक स्थित ब्राह्मण थाला गांव के बंदोबस्ती अभिलेख उपलब्ध न होने से ग्रामीणों को भूमि संबंधी कामों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। राजस्व अभिलेखागार में रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बंदोबस्ती नकल नहीं मिलने से जहां कई लोगों के जाति प्रमाणपत्र अटके हुए हैं, वहीं सड़क निर्माण में अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण लंबे समय से रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जल्द अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और रिकॉर्ड गायब होने की जांच कराने की बात कही है। ब्राह्मण थाला राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का पैतृक गांव है। भट्ट ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, अब जानकारी मिली है।
ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1936 में भूमि के सर्वेक्षण, सीमांकन और मालिकाना हक निर्धारित करने के लिए बंदोबस्त प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत गांवों की भूमि के नक्शे, खसरा-खतौनी और भू-राजस्व का निर्धारण किया गया। वर्ष 1957 में दोबारा बंदोबस्त हुआ, जो वर्ष 1962 तक मान्य रहा। इसके बाद दोबारा बंदोबस्त नहीं हुआ। पुराने बंदोबस्ती अभिलेख आज भी भूमि स्वामित्व से जुड़े राजस्व और कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज माने जाते हैं।
ग्राम प्रधान दीपक थपलियाल ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र पंचायत की बैठकों और पत्राचार के माध्यम से ब्राह्मण थाला का बंदोबस्ती रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि मोहनखाल-ताली सड़क निर्माण के दौरान थाला गांव के कई ग्रामीणों की भूमि सड़क में चली गई। जोरापाणी तोक की भूमि का मुआवजा बंदोबस्ती अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण अटका हुआ है।
ग्रामीण गणपति थपलियाल ने बताया कि भूमि उनके नाम दर्ज है, लेकिन बंदोबस्ती रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण वह अपने स्वामित्व को प्रमाणित नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है। वहीं हरीश थपलियाल के अनुसार अभिलेख उपलब्ध नहीं होने से परिवार में भूमि का बंटवारा भी लंबित है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के जाति प्रमाणपत्र बनवाने और भूमि अभिलेखों में नाम दर्ज कराने में भी बंदोबस्ती नकल की जरूरत पड़ रही है।
ब्राह्मण थाला राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का पैतृक गांव है। गांव में उनकी भी पुश्तैनी भूमि है। ग्रामीणों के मुताबिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से कई लोग अपने बच्चों के नाम भूमि अभिलेखों में दर्ज नहीं करा पा रहे हैं।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि ब्राह्मण थाला गांव के बंदोबस्ती रिकॉर्ड को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पहले ये अभिलेख पौड़ी मुख्यालय में रखे गए थे, जिन्हें अब जिला मुख्यालय लाया गया है। उन्होंने कहा कि थाला गांव का रिकॉर्ड कहां और कैसे गायब हुआ, इसकी जांच कराई जाएगी।




