
देहरादून : मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को शहीद स्थल कचहरी परिसर, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद आंदोलनकारियों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को नमन करते हुए उनके योगदान को उत्तराखण्ड के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को अलग राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। अनेक आंदोलनकारियों ने अपने अधिकारों और राज्य की मांग को लेकर कठिन परिस्थितियों का सामना किया तथा कई आंदोलनकारियों ने इसके लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया। उनके इसी संघर्ष और त्याग के परिणामस्वरूप उत्तराखण्ड राज्य का गठन संभव हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और शहीद आंदोलनकारियों का योगदान प्रदेश की जनता सदैव स्मरण करती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य केवल भौगोलिक सीमाओं का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के संघर्ष और आकांक्षाओं का परिणाम है, जिन्होंने अलग राज्य के लिए आंदोलन किया। राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखण्ड के विकास, पहचान और बेहतर भविष्य का सपना देखा था। आज राज्य की सरकार का दायित्व है कि विकास की योजनाओं और नीतियों के माध्यम से उनके सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों तथा शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों के सम्मान, कल्याण और हितों के लिए प्रतिबद्ध है। आंदोलनकारियों के योगदान और उनके संघर्ष को सम्मान देने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों की भावनाओं और उनकी अपेक्षाओं का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
श्री धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड को ऐसा राज्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां युवाओं को बेहतर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलें, महिलाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर प्राप्त हों तथा गांवों और पर्वतीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, पर्यटन, कृषि, स्वरोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों और पलायन की समस्या को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक उत्पादों और पर्यटन की संभावनाओं का बेहतर उपयोग कर उत्तराखण्ड को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की युवा शक्ति राज्य के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने जिस उत्तराखण्ड की कल्पना की थी, वह समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर और विकास के नए अवसरों से युक्त उत्तराखण्ड था। सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य के प्रत्येक क्षेत्र और वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि शहीद आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी राज्य आंदोलन के इतिहास और आंदोलनकारियों के संघर्ष को याद रखने तथा नई पीढ़ी को इससे परिचित कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। सभी के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद स्थल केवल श्रद्धांजलि देने का स्थान नहीं, बल्कि यह प्रदेश के लोगों को राज्य आंदोलन के संघर्ष, त्याग और बलिदान की याद दिलाने वाला महत्वपूर्ण स्थल है। यहां आकर प्रत्येक व्यक्ति को उन आंदोलनकारियों के योगदान का स्मरण होता है, जिन्होंने उत्तराखण्ड की पहचान और राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर सभी शहीद राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की जनता उनके बलिदान को कभी नहीं भुला सकती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार, राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं और जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप उत्तराखण्ड को विकास, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करती रहेगी।





