
नई दिल्ली: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं ने वोट चोरी के आरोपों और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उनकी लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस पूरे मार्च की अगुवाई लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और वोट चोरी से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर सकती है, लेकिन भारत की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र, संविधान और देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा। राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष का उद्देश्य देश की जनता की आवाज को सामने लाना और मताधिकार से जुड़े सवालों पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक, वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी का मुद्दा केवल किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध देश के प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार से है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के नेता प्यार, भाईचारे और देशभक्ति की भावना के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर रहकर अपने सवालों के जवाब मांग रहा है। उनके इस बयान को केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के व्यापक राजनीतिक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले कांत ने राहुल गांधी की मुलाकात करने की अपील को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने इसके पीछे यह तर्क दिया कि जिन मुद्दों पर राहुल गांधी चर्चा करना चाहते हैं, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में इन मामलों पर अलग से बातचीत करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ना उचित होगा। इस घटनाक्रम के बाद INDIA गठबंधन के नेताओं ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने का फैसला किया और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के जरिए मतदाता सूची के संशोधन तथा कथित वोट चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
इस मार्च में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं की भागीदारी भी चर्चा में रही। तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के भी इस राजनीतिक घटनाक्रम में शामिल होने की उम्मीद जताई गई। INDIA गठबंधन के नेताओं का उद्देश्य विभिन्न विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं का ध्यान आकर्षित करना है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विपक्षी दलों ने विशेष रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की गहन समीक्षा और संशोधन किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से न हटे और कोई योग्य मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए। वहीं, इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई और संबंधित मांगों पर निर्णय न्यायिक प्रक्रिया तथा संबंधित प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आएगा। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज होने की संभावना है।
INDIA गठबंधन के नेताओं के मार्च को देखते हुए दिल्ली के मध्य हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रमुख सड़कों, संवेदनशील स्थानों और महत्वपूर्ण इलाकों में पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा जा सके। राजधानी में पहले से जारी सुरक्षा इंतजामों के बीच इस मार्च को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता दिखाई दिया। पुलिस ने सोमवार के लिए यातायात संबंधी एडवाइजरी भी जारी की और लोगों से अपील की कि वे प्रभावित इलाकों में गैर-जरूरी यात्रा करने से बचें। इसके साथ ही वाहन चालकों से अनुरोध किया गया कि वे पुलिस के निर्देशों का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें और यातायात को सुचारू रूप से चलाने में प्रशासन का सहयोग करें।
प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का उद्देश्य मार्च के दौरान संभावित भीड़ और यातायात के दबाव को नियंत्रित करना था। मध्य दिल्ली के महत्वपूर्ण मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए लोगों को अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने की सलाह दी गई। पुलिस और यातायात अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए, ताकि आम नागरिकों को कम से कम परेशानी हो और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। राजनीतिक गतिविधियों के चलते राजधानी के व्यस्त इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहा।
इस बीच, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशनों पर प्रवेश और निकास द्वार फिर से खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही संबंधित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा भी बहाल कर दी गई है। मेट्रो सेवाओं से जुड़ी इन सुविधाओं की बहाली से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रभावित स्टेशनों पर आवाजाही को लेकर असुविधा की आशंका बनी हुई थी। DMRC की ओर से दी गई जानकारी के बाद यात्रियों के लिए मेट्रो स्टेशनों में प्रवेश, बाहर निकलने और दूसरे कॉरिडोर में जाने की सुविधा फिर से उपलब्ध होने की बात स्पष्ट हुई।
कुल मिलाकर, वोट चोरी के आरोपों और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न को लेकर INDIA गठबंधन का यह मार्च राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनकर सामने आया। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने इन मुद्दों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी रास्ता अपनाने पर जोर दिया। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शी मतदाता सूची और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा जरूरी है। वहीं, दिल्ली में मार्च को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए। मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार और इंटरचेंज सुविधाएं बहाल होने की जानकारी के बाद राजधानी में सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने वाले लोगों को भी राहत मिली।







