
देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले में हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले छह लोगों के शवों को निकालने के लिए शनिवार सुबह एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और अंधेरे में वन्यजीवों की सक्रियता के चलते शुक्रवार शाम बचाव अभियान रोकना पड़ा था। प्रशासन के अनुसार, शनिवार तड़के पांच बजे से अभियान दोबारा शुरू कर दिया गया।
बता दें कि शुक्रवार दोपहर बदरीनाथ से कर्नाटक के श्रद्धालुओं को लेकर लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर ज्योतिर्मठ के मारवाड़ी स्थित हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में हेलीकॉप्टर के पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दिल्ली निवासी पायलट और बेंगलुरु के पांच श्रद्धालु शामिल थे।
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हादसे के बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन में सभी छह शव चाई गांव के पास दुर्घटनास्थल के आसपास बरामद किए गए। शवों को बाहर निकालने के लिए शनिवार सुबह वन विभाग की टीम को भी घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए दुर्घटना की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। साथ ही दिवंगतों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के सीईओ प्रतीक जैन के मुताबिक, बरामद शवों को पहले चमोली जिला मुख्यालय लाया जाएगा। यहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शवों को देहरादून भेजा जाएगा।
वहीं, मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ान की अनुमति दिए जाने के सवाल पर प्रतीक जैन ने कहा कि इस संबंध में विभाग की ओर से भी परामर्श जारी किया गया था। हालांकि, पूरे मामले की जांच की जा रही है।
उधर, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने भी दुर्घटना का प्रारंभिक आकलन और नियामकीय जांच करने के लिए अपनी टीम देहरादून भेज दी है। जांच के बाद ही हादसे के कारणों और उड़ान से जुड़े पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







