
देहरादून: उत्तराखंड में नवंबर का महीना आम जनता के लिए कई महत्वपूर्ण गतिविधियों वाला रहने जा रहा है। प्रदेश में एक ओर चुनाव आयोग मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान शुरू करने जा रहा है, तो दूसरी ओर देश की पहली डिजिटल जनगणना की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि इस बार प्रदेश के नागरिकों को अपनी जनगणना खुद ऑनलाइन दर्ज कराने का भी अवसर मिलेगा। यानी नवंबर महीने में प्रदेशवासियों को वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने, गलतियों को ठीक कराने और जनगणना में अपनी जानकारी दर्ज कराने जैसे महत्वपूर्ण काम करने होंगे।
सबसे पहले बात करते हैं मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान की। अगर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से कट गया है या किसी कारणवश अब तक उसका वोटर कार्ड नहीं बन पाया है, तो ऐसे लोगों के लिए राहत की खबर है। निर्वाचन आयोग की ओर से 12 नवंबर से उत्तराखंड में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से पात्र नागरिक अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में दर्ज करा सकेंगे। वहीं, जिन युवाओं ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, वे भी नए मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
इसके लिए संबंधित नागरिकों को फॉर्म-6 भरकर आवेदन करना होगा। इतना ही नहीं, जिन मतदाताओं के नाम, पते या अन्य विवरणों में किसी तरह की गलती है, वे भी इस अभियान के दौरान अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकेंगे। अगर किसी व्यक्ति के विधानसभा क्षेत्र या शहर में बदलाव हुआ है और मतदाता सूची में उसे अपडेट कराना जरूरी है, तो उसके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकेगा। निर्वाचन आयोग की ओर से 12 नवंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। इसी के साथ विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत होगी। इसके बाद पात्र नागरिकों को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 11 दिसंबर तक का समय दिया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि ऐसे युवा जो पहली अप्रैल, पहली जुलाई या पहली अक्तूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे भी मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए अग्रिम आवेदन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न रहना पड़े। इसके अलावा मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जिला स्तर पर सहायता केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को आवेदन और पंजीकरण संबंधी जानकारी दी जाएगी। खासतौर पर प्रवासी नागरिकों, कमजोर वर्गों और वंचित समुदायों के लोगों को इन केंद्रों पर विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अभियान की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अगले साल चार जनवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में जिन लोगों का नाम अभी तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है या जिनके विवरण में कोई गलती है, उनके पास इसे ठीक कराने का अच्छा मौका होगा।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
वहीं, नवंबर महीने में प्रदेश में एक और बड़ा काम शुरू होने जा रहा है, जिसका सीधा संबंध देश की पहली डिजिटल जनगणना से है। इस बार जनगणना की प्रक्रिया में आम नागरिकों को भी सीधे भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। इसके तहत 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक डिजिटल स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यानी अब लोगों को जनगणना कर्मचारियों के घर पहुंचने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। वे निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर खुद अपनी और अपने परिवार की जनगणना से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि डिजिटल स्व-गणना के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को अपनी जानकारी भरने की सुविधा दी जाएगी। इसके बाद एक दिसंबर से प्रदेशभर में घर-घर जाकर जनगणना का कार्य शुरू होगा, जो अगले साल चार जनवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान जनगणना कर्मी घरों तक पहुंचकर लोगों से आवश्यक जानकारियां एकत्र करेंगे। खास बात यह है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मोबाइल एप्लीकेशन और डिजिटल उपकरणों की मदद से आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिससे जानकारी एकत्र करने और उसे व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इस बार जनगणना की प्रश्नावली में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां प्रश्नों की संख्या 33 थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 40 कर दिया गया है। यानी नागरिकों से इस बार पहले की तुलना में अधिक जानकारियां जुटाई जाएंगी। जनगणना निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड में जनगणना को लेकर किसी तरह का कार्यक्रम स्थगित नहीं किया गया है। निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक, अन्य राज्यों में जनगणना को लेकर जारी हुई नवीन अधिसूचना के कारण उत्तराखंड के कार्यक्रम को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। हालांकि उत्तराखंड समेत चार राज्यों के लिए अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है और प्रदेश में उसी के अनुसार जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने साफ किया कि जनगणना से जुड़े कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न ही इसे स्थगित किया गया है। ऐसे में प्रदेश के नागरिकों को किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम में आने की जरूरत नहीं है। सभी लोगों से अपील की गई है कि वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जनगणना में सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं।
कुल मिलाकर नवंबर का महीना उत्तराखंड के नागरिकों के लिए दो महत्वपूर्ण सरकारी प्रक्रियाओं से जुड़ा रहने वाला है। एक तरफ मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और उसमें सुधार कराने का अवसर मिलेगा, तो दूसरी तरफ 16 नवंबर से लोग घर बैठे अपनी और अपने परिवार की जनगणना संबंधी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। ऐसे में सभी पात्र नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे निर्धारित तारीखों का ध्यान रखें और समय रहते इन दोनों प्रक्रियाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।






