
पीलीभीत : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र (127) की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मामले में पुलिस ने दो पूर्व उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस अब आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 198 जोड़ने की तैयारी कर रही है। पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने मंगलवार को बताया कि इस संबंध में जांच अधिकारी को सोमवार देर रात आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि धारा जोड़ने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपियों से जल्द पूछताछ की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान प्राप्त ऑफलाइन आवेदनों की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में पता चला कि 31 मई से 28 अगस्त के बीच कुल 13,779 ऑफलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 10,470 आवेदनों को स्वीकृति दी गई, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त कर दिए गए। हैरानी की बात यह रही कि संबंधित कार्यालय में इन आवेदनों से जुड़े मूल फॉर्म और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब अलग-अलग मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र (एपिक) नंबर एक समान होने की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की तहरीर पर 22 अक्टूबर को पीलीभीत कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी, हेमंत चौधरी और मतदाता पंजीकरण केंद्र में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को आरोपी बनाया गया था।
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तीनों को निलंबित भी किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आयोग ने 31 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 198 शामिल करने और मामले में न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इससे पहले आरोपियों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत मामला दर्ज किया गया था।






