
सैदपुर : मदरसा इस्लाहुल बनात जामिया ख़दीजतुल कुबरा की छात्राओं ने यूपी बोर्ड परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। 7 दिसंबर 2025 को आयोजित सम्मान कार्यक्रम में बच्चियों ने अपने कोचिंग शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए फूल मालाएं पहनाकर और उपहार भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। यह दृश्य बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा, जहां गुरु-शिष्य के रिश्ते की मिसाल पूरे समाज के सामने नजर आई।
मदरसा ख़दीजतुल कुबरा के डायरेक्टर अब्दुल कय्यूम भाई (मुंबई वाले) और मैनेजर मौलाना मुम्ताज़ हैदर की इजाज़त व मार्गदर्शन में छात्राओं को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा दिलाने की पहल की गई। मौलाना मुम्ताज़ हैदर ने बदलते दौर की ज़रूरतों को देखते हुए छात्राओं का रजिस्ट्रेशन यूपी बोर्ड की कक्षा 10 में भी करवाया और उनकी पढ़ाई की मजबूत तैयारी के लिए शिक्षक मुहम्मद खालिद खान और अब्दुल गनी सर से संपर्क किया। दोनों शिक्षकों ने पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ बच्चियों को शिक्षा प्रदान की। विशेष बात यह रही कि खालिद खान सर ने इसे इंसानी खिदमत और भलाई का काम मानते हुए पूरी ट्यूशन फ्री ऑफ कॉस्ट दी, जिससे बच्चियों में और अधिक लगन और आत्मविश्वास पैदा हुआ।
मुश्किल मेहनत, लगन, और शिक्षकों के मार्गदर्शन का फल इस रूप में मिला कि मदरसे की सभी छात्राओं ने यूपी बोर्ड परीक्षा में 1st डिवीजन से सफलता हासिल की। इस परिणाम के बाद मदरसे और बस्ती में खुशी का माहौल छा गया और बच्चियों, उनके परिवारों और शिक्षकों में जश्न का रंग देखने को मिला। बच्चियों ने अपने सम्मान के रूप में सिर्फ फूल मालाएं ही नहीं, बल्कि अपने उस्तादों और उनकी फैमिली के लिए कपड़ों का तोहफा भी पेश किया, जो उनके दिली एहसास और शुक्राने की गवाही देता है। कार्यक्रम के दौरान बच्चियों ने शिक्षकों का हाथ चूमकर और दुआएं लेकर अपनी मोहब्बत और एहतराम भी जताया, जिससे वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
इस प्रेरणादायक माहौल में मदरसे की प्रबंधन कमेटी के अन्य अराकीन ने भी बच्चियों के उज्ज्वल भविष्य की दुआ करते हुए कहा कि समाज में इसी तरह शिक्षा का उजाला फैलाना और बच्चों को आगे बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के रास्ते पर चलकर ही बेटियां और अधिक सशक्त बनेंगी और समाज के निर्माण में बड़ा योगदान देंगी।
बस्ती और आसपास के इलाकों में इस कामयाबी की चर्चा लगातार हो रही है। जहां एक ओर बच्चियों ने साबित किया कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, वहीं मदरसे की यह पहल दूसरे शैक्षणिक संस्थानों को भी प्रेरणा दे रही है कि बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के अवसर दिए जाएं। सैदपुर की यह कामयाबी केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि बेटियों की शिक्षा और जागरूकता की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
रिपोर्ट
ज़ीशान सिद्दीकी, सैदपुर





