

(सलीम रज़ा,पत्रकार)
रंगों का त्योहार केवल खुशियों, उमंग और आपसी मेलजोल का अवसर नहीं होता, बल्कि यह हमारे जीवन को नई दिशा देने वाला संदेश भी लेकर आता है। जब पूरा देश रंगों में सराबोर होता है, तब वातावरण में केवल गुलाल की खुशबू ही नहीं, बल्कि रिश्तों की मिठास और दिलों की दूरियां मिटाने की भावना भी घुल जाती है। यही वह समय होता है जब हम बीते हुए मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं और जीवन को नई शुरुआत देने का संकल्प लेते हैं।
रंगोत्सव हमें सिखाता है कि जैसे अलग-अलग रंग मिलकर एक खूबसूरत तस्वीर बनाते हैं, वैसे ही समाज भी विविधताओं से मिलकर सुंदर बनता है। कोई रंग छोटा या बड़ा नहीं होता, हर रंग का अपना महत्व और अस्तित्व होता है। ठीक इसी प्रकार हर व्यक्ति का समाज में अपना स्थान है, उसकी अपनी पहचान और योगदान है। जब हम इस विविधता को स्वीकार करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में सामाजिक सौहार्द स्थापित होता है। रंग हमें यह भी याद दिलाते हैं कि भेदभाव, जाति, धर्म, भाषा या वर्ग के नाम पर खड़ी की गई दीवारें केवल मन की उपज हैं, जिन्हें प्रेम और विश्वास से गिराया जा सकता है।
यह पर्व हमें क्षमा और पुनर्मिलन का भी संदेश देता है। जीवन की दौड़ में अक्सर छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते बिगड़ जाते हैं, मन में कटुता घर कर लेती है और संवाद की जगह दूरी ले लेती है। रंगोत्सव के अवसर पर जब हम किसी को रंग लगाते हैं, तो वह केवल एक औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह मन के मैल को धोने का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि मन में जमा कड़वाहट को मिटाकर आगे बढ़ना ही सच्ची जीत है। जो व्यक्ति क्षमा करना सीख लेता है, वही वास्तव में आंतरिक शांति का अनुभव कर सकता है।
इसके साथ ही यह पर्व संयम और जिम्मेदारी का भी पाठ पढ़ाता है। उत्सव की आड़ में यदि किसी को कष्ट पहुंचे, पर्यावरण को हानि हो या सामाजिक मर्यादाएं टूटें, तो वह उत्सव अपनी गरिमा खो देता है। रंगोत्सव का आनंद तभी सार्थक है जब उसमें सुरक्षा, सम्मान और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाए। प्राकृतिक रंगों का उपयोग, पानी की बचत और दूसरों की सहमति का सम्मान—ये छोटी-छोटी बातें ही इस पर्व को सच्चे अर्थों में पावन बनाती हैं। आनंद और अनुशासन का संतुलन ही उत्सव को दीर्घकालिक खुशी में बदल सकता है।
रंगोत्सव हमें जीवन के सकारात्मक पक्ष को देखने की प्रेरणा भी देता है। जैसे सफेद वस्त्र पर जब रंग पड़ता है तो वह और भी आकर्षक बन जाता है, वैसे ही कठिनाइयों के बीच आशा के रंग जीवन को अर्थपूर्ण बना देते हैं। हर समस्या के बाद समाधान का एक रंग अवश्य होता है, बस उसे देखने की दृष्टि चाहिए। यह पर्व हमें निराशा के अंधकार से बाहर निकलकर आशा, विश्वास और उत्साह के रंगों को अपनाने का संदेश देता है।
अंततः रंगोत्सव केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है। यह हमें सिखाता है कि जीवन को रंगीन बनाने के लिए बाहरी रंगों से अधिक आवश्यक है मन के रंगों को उज्ज्वल रखना। प्रेम, करुणा, क्षमा, सहयोग और सम्मान—ये वे रंग हैं जो कभी फीके नहीं पड़ते। यदि हम इन मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें, तो हर दिन हमारे लिए एक नया रंगोत्सव बन सकता है। यही इस पर्व की सच्ची सीख है कि रंगों की तरह हम भी अपने भीतर की अच्छाइयों को दुनिया के सामने बिखेरें और समाज को और अधिक सुंदर, समरस और सकारात्मक बनाएं।







