
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये की स्वीकृति देकर देश की जनसांख्यिकीय डेटा प्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है। यह पहली बार होगा जब भारत पूरी तरह डिजिटल जनगणना करेगा, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल दोनों माध्यमों से डेटा संग्रह किया जाएगा। सरकार का यह फैसला न सिर्फ परंपरागत कागजी तरीके को पीछे छोड़ता है, बल्कि इसे अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि डिजिटल रूपांतरण से शहरीकरण और बदलते सामाजिक ढांचे को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। इस बजट से एप्लिकेशन विकास, सर्वर क्षमता, सुरक्षा ढांचे और देशभर में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने जैसे कार्यों को गति मिलेगी, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी बिना बाधा आंकड़े दर्ज किए जा सकें।
जनगणना दो चरणों में होने जा रही है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरे देश में मकानों की सूची बनाई जाएगी और आवास से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की जाएगी, जिसे प्रत्येक राज्य में 30 दिनों के भीतर पूरा करने की योजना है। इसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसके लिए 1 मार्च 2027 की आधी रात को संदर्भ समय माना जाएगा।
बर्फबारी वाले संवेदनशील इलाकों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में पूरी की जाएगी, जिसमें 1 अक्टूबर को संदर्भ समय माना जाएगा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि मोबाइल एप के माध्यम से फील्ड सर्वे और वेब पोर्टल के जरिए सेल्फ-एन्यूमरेशन, दोनों विकल्प उपलब्ध होंगे। एक केंद्रीकृत पोर्टल पूरी प्रक्रिया पर वास्तविक समय में नजर रखेगा, जिससे त्रुटियों की संभावना और भी कम हो जाएगी।
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह नई कार्यप्रणाली न सिर्फ जनगणना को अधिक विश्वसनीय बनाएगी बल्कि नीति निर्माण और संसाधन वितरण में भी अधिक सटीकता लाएगी, जिससे विकास योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार की जा सकेंगी।





