
जोधपुर : देश के पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले और लंबे समय से सनातन धर्म व हिंदुत्व के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी ने अब आध्यात्मिक जीवन में एक नया और उच्चतम सोपान प्राप्त किया है। साधारण परिवार में जन्मे ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी ने अपने जीवन की शुरुआत संघर्ष और सेवा के मार्ग से की और समय के साथ पत्रकारिता, सामाजिक चेतना तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के क्षेत्र में एक सशक्त पहचान स्थापित की।
ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। अपनी निर्भीक लेखनी और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट विचारों के कारण वे जल्द ही “कलम के सिपाही” के रूप में पहचाने जाने लगे। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में कार्य करते हुए समाज को जागरूक करने का कार्य किया। दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय शान, उपदेश टाइम, राष्ट्रीय जजमेंट, राष्ट्रीय पहल और स्वतंत्र प्रबोध पत्रिका सहित कई मीडिया संस्थानों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। इसके साथ ही वे IBN 20-20 मध्य प्रदेश में नेशनल ब्यूरो चीफ के पद पर भी कार्यरत रहे। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और नेपाल के काठमांडू में भगवान पशुपतिनाथ के आशीर्वाद से उन्हें सम्मानित किया गया।
पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने संगठनों के माध्यम से पत्रकारों के हितों की रक्षा और संगठनात्मक मजबूती पर भी कार्य किया। वे भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) के राष्ट्रीय सचिव, इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जनरलिस्ट के अंतर्गत नेशनल सेक्रेट्री रहे और वर्तमान में पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन रजिस्टर्ड भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
समय के साथ उनका झुकाव सनातन धर्म, हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र निर्माण के विचारों की ओर और अधिक गहरा होता गया। उन्होंने स्वयं को हिंदू समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवादी मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। इस उद्देश्य से वे अखिल भारतीय हिंदू परिषद में राष्ट्रीय मुख्य सचिव, अखिल भारत हिंदू महासभा में राष्ट्रीय महामंत्री तथा कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास में राष्ट्रीय महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते रहे। इन संगठनों के माध्यम से उन्होंने हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया।
अध्यात्म के क्षेत्र में उनकी यात्रा अखाड़ों से जुड़ाव के साथ और अधिक सशक्त हुई। उन्होंने महाकाल भैरव अखाड़ा में राष्ट्रीय महासचिव, अंतर्राष्ट्रीय सूर्यवंशी अखाड़ा में राष्ट्रीय सचिव एवं मीडिया प्रभारी तथा अंतर्राष्ट्रीय सप्त ऋषि अखाड़ा में लगभग दो वर्षों तक राष्ट्रीय सचिव और मीडिया प्रभारी के रूप में सेवा दी। उनकी निष्ठा, सेवा और वैचारिक प्रतिबद्धता को देखते हुए वृंदावन में अखाड़ा प्रमुख पीठाधीश्वर जगतगुरु सच्चिदानंद बाल प्रभु जी द्वारा उन्हें ‘श्री श्री 1008 ललित आदित्य महाराज’ के रूप में महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई।
इसके पश्चात देश के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े अखाड़ों में से एक जूना अखाड़े द्वारा उन्हें और भी बड़ा सम्मान प्रदान किया गया। अवधूत सेवा संघ आश्रम, दिल्ली से स्वामी मुकुंदानंद महामंडलेश्वर चक्र तीर्थ नैमिषारण्य (सीतापुर, उत्तर प्रदेश) के शिष्य स्वामी मंगलानंद जी महाराज द्वारा उन्हें ‘स्वामी ललितेश्वरानंद जी महाराज’ की उपाधि दी गई। अंततः जूना अखाड़े ने उन्हें ‘स्वामी ललितेश्वरानंद महाराज श्री श्री 1008’ की सर्वोच्च उपाधि से विभूषित कर उनके आध्यात्मिक समर्पण और सनातन धर्म के प्रति निष्ठा को मान्यता दी।
इस अवसर पर स्वामी ललितेश्वरानंद महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि वे अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा, आमजन के कल्याण, हिंदुत्व की रक्षा और हिंदू राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य के लिए समर्पित रखते हुए कार्य करते रहेंगे। उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने में मार्गदर्शन देने वाले सभी गुरुजनों, साधु-संतों और शुभचिंतकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
ललित अग्रवाल हिंदुस्तानी से स्वामी ललितेश्वरानंद महाराज बनने तक की यह यात्रा संघर्ष, सेवा, विचार और समर्पण की कहानी है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज को जागरूक करने से लेकर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर होने तक, उनका जीवन यह संदेश देता है कि सेवा और संघर्ष के पथ पर चलते हुए कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। आज वे न केवल पत्रकारिता और हिंदू समाज में, बल्कि आध्यात्मिक क्षेत्र में भी एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित हो चुके हैं।





