
देहरादूनः मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन द्वारा मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक प्रेरणादायी और सेवा भाव से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अपने-अपने घरों, दुकानों एवं कार्यालयों में कार्य करने वाले कामगारों को शॉल ओढ़ाकर पर्व को मानवीय संवेदना के साथ मनाया। इस अवसर पर ठंड से राहत पहुंचाने के उद्देश्य से जरूरतमंदों को शॉल और कंबल वितरित किए गए, जिससे कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह सेवा और करुणा से ओतप्रोत नजर आया।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सचिन जैन ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन हमेशा से समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य करता आया है और आगे भी मानव सेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड में जब श्रमिक और कामगार दिनभर खुले वातावरण में मेहनत करने को विवश होते हैं, ऐसे समय में शॉल उनके लिए न केवल ठंड से बचाव का साधन होती है, बल्कि उनके जीवन में आत्मीयता और सम्मान का भी प्रतीक बनती है।
श्री सचिन जैन ने कहा कि प्रायः लोग कंबल का उपयोग रात्रि में करते हैं, लेकिन दिन के समय ठंड से बचाव के लिए शॉल अत्यंत उपयोगी होती है। ऐसे में अपने आसपास कार्य करने वाले कामगारों को शॉल भेंट करना ही सच्ची सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचायक है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे आगे बढ़कर इस तरह के पुण्य कार्यों में सहभागी बनें, क्योंकि किसी के जीवन में थोड़ी सी मदद भी बड़ी राहत और सुकून का कारण बन सकती है।
कार्यक्रम की संयोजक एवं संगठन की प्रदेश अध्यक्ष मधु जैन ने कहा कि मकर संक्रांति केवल पर्व मनाने का अवसर ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां बांटने का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज में मानवता, संवेदना और सेवा की भावना को मजबूत करना है और इसी दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस सेवा कार्यक्रम में संगठन के अनेक सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सुनील अग्रवाल, गीता वर्मा, रेखा निगम, मधु जैन, सचिन जैन, नरेश चंद जैन, संदीप जैन सहित अन्य सदस्यों ने कामगारों को शॉल एवं कंबल प्रदान कर उन्हें मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान कामगारों के चेहरों पर संतोष और मुस्कान देखने को मिली, जिससे आयोजन की सार्थकता स्वयं स्पष्ट हो गई।
सेवा भाव से सम्पन्न यह आयोजन समाज में आपसी सहयोग, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक प्रेरक उदाहरण बना, जिसने यह संदेश दिया कि पर्व केवल उत्सव का ही नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का भी माध्यम होना चाहिए।





