
प्रयागराज : माघ मेले में संत समाज और प्रशासन के बीच टकराव अब नया मोड़ ले चुका है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनसे 24 घंटे के भीतर यह प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है कि वे वास्तव में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं। प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद उन्होंने अपने नाम के साथ शंकराचार्य पद का प्रयोग किया, जो नियमों के विरुद्ध है।
विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर हुई, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच तनातनी देखने को मिली। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद उन्हें बिना संगम स्नान किए ही शिविर लौटना पड़ा, जिसके बाद मामला और अधिक गरमा गया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासनिक कार्रवाई को साजिश करार देते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उनके शिष्यों के साथ मारपीट हुई। उन्होंने मीडिया के सामने अपने शिष्यों को पेश कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
वहीं मेला प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य का आधिकारिक दर्जा प्राप्त नहीं है, इसी कारण उन्हें प्रोटोकॉल नहीं दिया गया। प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से अनिवार्य है।
इधर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। वह अपने समर्थकों और संतों के साथ त्रिवेणी मार्ग पर शिविर के बाहर बैठे हुए हैं और मेला प्रशासन से सार्वजनिक माफी तथा सम्मानपूर्वक संगम स्नान की मांग पर अड़े हुए हैं। उनके समर्थन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंच रहे हैं, जिससे यह मामला अब धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है।
मेला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेसवार्ता बुलाने की घोषणा की है, जिसमें वे अपने पक्ष से जुड़े दस्तावेज पेश कर सकते हैं और आगे की रणनीति स्पष्ट कर सकते हैं।




