
देहरादून : उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री वी.के. बिष्ट के नेतृत्व में आयोग की एक उच्चस्तरीय टीम ने मंगलवार को जिला कारागार देहरादून का निरीक्षण किया। इस दौरान आयोग के सदस्य श्री गिरधर सिंह धर्मशक्तु एवं श्री राम सिंह मीणा भी उनके साथ मौजूद रहे। निरीक्षण का उद्देश्य कारागार में निरुद्ध बंदियों को मिल रही सुविधाओं, व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पुनर्वास कार्यक्रमों की स्थिति का जायजा लेना था।
निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने कारागार परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण अनुभागों का भ्रमण किया। टीम ने कारागार की पाकशाला, कैंटीन, अस्पताल, लॉन्ड्री मशीन, कौशल विकास केंद्र एवं महिला अहाता सहित विभिन्न बैरकों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने निरुद्ध बंदियों से सीधे संवाद कर उन्हें मिल रही सुविधाओं, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, प्रशिक्षण एवं अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। बंदियों ने अपनी समस्याओं और सुझावों को आयोग के समक्ष रखा।
टीम द्वारा कारागार अधिकारियों से बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास हेतु संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं की भी जानकारी ली गई। अधिकारियों ने बताया कि कारागार में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में पुनः सम्मानजनक जीवन जी सकें।
निरीक्षण के दौरान कुछ बंदियों द्वारा अपने पैरोल एवं फरलो प्रार्थना पत्रों के निस्तारण तथा समयपूर्व रिहाई के मामलों में विलंब होने की शिकायत भी आयोग के समक्ष रखी गई। इस पर माननीय अध्यक्ष श्री वी.के. बिष्ट ने गंभीरता दिखाते हुए कारागार अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में समयबद्ध एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि बंदियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कारागार व्यवस्था में पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बंदियों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सरकार एवं प्रशासन को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान कारागार प्रशासन की ओर से उप महानिरीक्षक कारागार श्री दधिराम, जेलर श्री पवन कुमार कोठारी, चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकित गुसाईं सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।
मानवाधिकार आयोग की यह पहल कारागार व्यवस्था में सुधार, बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा तथा मानवीय दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आयोग द्वारा किए गए इस निरीक्षण से कारागार प्रशासन को अपनी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं संवेदनशील बनाने की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।




