
देहरादून : उत्तराखंड होमगार्ड विभाग में सामने आए करोड़ों रुपये के वर्दी घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गृह विभाग ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। घोटाले के केंद्र में डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव हैं, जिन पर अपने पद का दुरुपयोग कर बाजार भाव से तीन गुना कीमत पर वर्दी व अन्य सामग्री खरीदने के गंभीर आरोप लगे हैं।
गृह विभाग को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में जवानों के लिए खरीदी गई वर्दी और अन्य उपकरणों की वास्तविक लागत करीब एक करोड़ रुपये थी, लेकिन इन्हें तीन करोड़ रुपये में खरीदा गया। आरोप है कि इस खरीद में अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत रही।
कमांडेंट जनरल होमगार्ड पीवीके प्रसाद ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच करवाई, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट में डीसीजी अमिताभ श्रीवास्तव को सेवा से बर्खास्त करने और उनसे दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने की संस्तुति की गई है। यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि कमांडेंट जनरल की ओर से करीब 15 दिन पहले पत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें इस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी दी गई थी। इसके बाद शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम गठित कर दी गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।
जांच में सामने आया है कि विभाग में डंडा, जूते, पैंट-शर्ट और जैकेट जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं बाजार कीमत से कई गुना अधिक दरों पर खरीदी गईं। 130 रुपये का डंडा 375 रुपये में, 500 रुपये के जूते 1500 रुपये में, 1200 रुपये की वर्दी 3000 रुपये में और 500 रुपये की जैकेट 1580 रुपये में खरीदी गई।
वर्ष 2025-26 में जब इन्हीं दरों पर दोबारा टेंडर जारी किया गया तो कमांडेंट जनरल को कीमतों पर संदेह हुआ। बाजार से कोटेशन मंगवाने पर तीन गुना कीमत का खुलासा हुआ, जिसके बाद तत्काल टेंडर निरस्त कर जांच के आदेश दिए गए।
घोटाले के उजागर होने के बाद विभाग में वर्दी की खरीद पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि यह मामला आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे कर सकता है।






