
नई दिल्ली : संसद भवन परिसर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भव्य स्वागत हुआ और उनके अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई। धुंध भरी सुबह में पारंपरिक बग्घी से उनका आगमन हुआ, जिसे छह घोड़ों ने खींचा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरन रीजीजू ने गज द्वार पर उनका स्वागत किया। अश्वारोही अंगरक्षक दल और गार्ड ऑफ ऑनर ने इस अवसर को और भी औपचारिक बना दिया।
राष्ट्रपति के आगमन से पहले लोकसभा के वरिष्ठ मार्शल ने राजदंड को पारंपरिक वेश में उठाकर ड्रम की थाप के साथ लोकसभा कक्ष तक पहुंचाया। यह दृश्य परंपरा और आधुनिक लोकतंत्र के संगम का प्रतीक बना। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित किया और देश की नीतिगत दिशा का खाका प्रस्तुत किया।
अभिभाषण में राष्ट्रपति ने सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, किसान और पशुपालकों के लिए सुविधाएं और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पौने सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लोगों तक पहुंची है और बीते एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाया गया है।
राष्ट्रपति ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति का भी जिक्र किया। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गगनयान मिशन पर चल रहे कार्यों को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
भारतीय रेल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन और देशभर में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेनों के नेटवर्क को गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने सौ प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य, चिनाब और पंबन पुल जैसे विश्वस्तरीय ढांचागत निर्माण और दिल्ली-आइजोल सीधी रेल कड़ी का जिक्र किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण ‘सबका साथ, सबका विकास’ और गरीबों व वंचितों के लिए सशक्तिकरण पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की गति और तकनीकी प्रगति का लाभ आम जनता तक पहुंचना जरूरी है।
संपूर्ण अभिभाषण में परंपरा, आधुनिकता और विकास का संगम दिखा। राष्ट्रपति ने ग्रामीण भारत को योजनाबद्ध विकास का केंद्र बनाने पर बल दिया, जबकि विपक्ष के विरोध के बावजूद उन्होंने स्पष्ट और दृढ़ स्वर में सरकार का पक्ष रखा। उनका संदेश उम्मीद और चुनौती दोनों प्रस्तुत करता है: भारत मजबूत नींव पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करना अगली बड़ी परीक्षा है।






