
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच हुई यह भेंट केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीतिक संस्कृति में आपसी सम्मान, मानवीय संवेदना और कृषि परंपरा के प्रति आदर का प्रतीक बनकर सामने आई। खेत में उपजे चावल का उपहार और स्वास्थ्य की कामना ने यह संदेश दिया कि राजनीति से ऊपर इंसानियत और संस्कृति का स्थान सर्वोपरि है।
देहरादून : डिफेंस कॉलोनी में उस समय सौहार्द और आत्मीयता का वातावरण देखने को मिला, जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री हरीश रावत से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात औपचारिकता से आगे बढ़कर मानवीय संवेदनाओं और राजनीतिक मर्यादाओं का सुंदर उदाहरण बनी।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने इस दौरान श्री रावत का कुशलक्षेम जाना और उनके स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के अनुभव और योगदान का सम्मान करते हुए उनसे आत्मीय संवाद भी किया।
स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना
भेंट के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री हरीश रावत के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि श्री रावत ने उत्तराखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उनका अनुभव प्रदेश की राजनीतिक विरासत का अहम हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्रदेश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
खेत में उपजे चावल भेंट कर दिया विशेष संदेश
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने एक आत्मीय प्रतीक के रूप में अपने खेत में उत्पादित चावल श्री हरीश रावत को भेंट किए। यह उपहार केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि उत्तराखंड की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आत्मा गांवों और खेतों में बसती है और स्थानीय उत्पादों को सम्मान देना हमारी संस्कृति और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक मजबूत कदम है।
हरीश रावत ने जताया आभार, बताया शिष्टाचार की मिसाल
पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के इस स्नेहिल व्यवहार और आत्मीय भेंट के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह भेंट राजनीति में आपसी सम्मान, सद्भाव और शिष्टाचार की परंपरा को मजबूत करती है। रावत ने कहा कि वैचारिक भिन्नताओं के बावजूद इस प्रकार के मानवीय और सांस्कृतिक व्यवहार लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाते हैं।






