
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चल रही अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अजित पवार के निधन के बाद समीकरण तेजी से बदले हैं और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की संभावना और शरद पवार की रणनीतिक चुप्पी ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है।
राउत का आरोप: भाजपा बनी एनसीपी एकता में दीवार
मुंबई : शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शनिवार को मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा ऐसी ताकत बन चुकी है जो सहयोगी दलों को एक नहीं होने देती। उन्होंने दावा किया कि यदि अजित पवार जीवित होते, तो एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की संभावना बनी रहती।
विलय की इच्छा थी, लेकिन हालात बदल गए
अजित पवार के करीबी सहयोगी किरण गुजर ने बताया कि दिवंगत नेता एनसीपी के पुनर्एकीकरण के पक्ष में थे। हालांकि, एनसीपी विधायक अनिल पाटिल ने साफ किया कि अजित पवार के निधन के बाद फिलहाल यह विकल्प ठंडे बस्ते में चला गया है, हालांकि भविष्य में बातचीत की गुंजाइश से इनकार नहीं किया गया।
सुनेत्रा पवार के नाम पर सियासी मंथन
एनसीपी के भीतर सुनेत्रा पवार को विधानसभा दल का नेता और उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने संकेत दिया कि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के स्तर पर होगा।
शरद पवार की भूमिका और दूरी
एनसीपी (एससीपी) प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट किया कि उन्हें सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने की किसी औपचारिक पहल की जानकारी नहीं है। संजय राउत ने भी कहा कि एनसीपी एक स्वतंत्र राजनीतिक इकाई है और उसके आंतरिक फैसलों में बाहरी दलों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।-





