
देहरादून : उत्तराखंड के विभिन्न सामाजिक, किसान और कर्मचारी संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय किसान संघ, उत्तराखंड कर्मचारी संघ, राज्य पर्यावरण विज्ञान परिषद, पर्वतीय पत्रकार संघ, उत्तराखंड जनवादी पार्टी सहित कई संगठनों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा लागू किए जा रहे डिजिटल ऐप आधारित सर्वे और सत्यापन प्रक्रिया का विरोध करना रहा। संगठनों का कहना है कि पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में डिजिटल ऐप के माध्यम से सर्वे कराना व्यवहारिक नहीं है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राज्य के कई पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में डिजिटल ऐप पर आधारित सर्वे किसानों और आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। कई स्थानों पर नेटवर्क न होने के कारण सर्वे प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
संगठनों ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सर्वे कार्य फील्ड स्तर पर सर्वे कर्मियों द्वारा सीधे जाकर किया जाता है, जबकि उत्तराखंड में डिजिटल माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है। इससे किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बैठक के अंत में सभी संगठनों ने एक संयुक्त मंच बनाकर डिजिटल ऐप सर्वे के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया और सरकार से मांग की कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सर्वे की वैकल्पिक और सरल व्यवस्था लागू की जाए।





