
देहरादून में आयोजित अंकिता न्याय महापंचायत ने एक बार फिर CBI जांच, VIP की भूमिका उजागर करने और निष्पक्ष न्याय की मांग को मजबूती दी। अंकिता के माता-पिता की मौजूदगी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बयान और 15 दिनों का अल्टीमेटम इस बात का संकेत है कि यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उत्तराखंड की जनता स्पष्ट संदेश दे रही है—न्याय अधूरा नहीं चलेगा।
अंकिता न्याय यात्रा संघर्ष मंच के नेतृत्व में महापंचायत
देहरादून : परेड ग्राउंड के पास अंकिता न्याय यात्रा संघर्ष मंच के नेतृत्व में एक बड़ी महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। महापंचायत में पांच प्रस्ताव पारित किए गए और अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच की मांग को एक बार फिर तेज किया गया।
इस दौरान सवाल उठाया गया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के आधार पर अब तक CBI जांच क्यों नहीं कराई गई, जबकि पीड़ित परिवार लगातार इसकी मांग कर रहा है। महापंचायत में अंकिता के माता-पिता स्वयं मौजूद रहे, जिससे माहौल भावुक और संघर्षपूर्ण नजर आया।
CBI जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो
महापंचायत में यह मांग प्रमुखता से उठाई गई कि अंकिता भंडारी मामले की जांच CBI से कराई जाए और यह जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
वक्ताओं ने कहा कि यदि जांच सही दिशा में होती, तो अब तक हत्याकांड में शामिल कथित VIP का नाम सामने आ चुका होता। मंच से यह भी चेतावनी दी गई कि यदि 15 दिनों के भीतर VIP का नाम उजागर नहीं किया गया, तो उत्तराखंड की जनता जन आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
हरीश रावत बोले—राजनीति से ऊपर है जनभावना
महापंचायत में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि न्याय और जनभावना की लड़ाई है। उन्होंने कहा—
“अन्याय के खिलाफ पूर्व सैनिक, आंदोलनकारी, राजनीतिक दल, इंडिया गठबंधन समेत कई दलों के लोग एकजुट हुए हैं। जब न्याय की लड़ाई होती है, तब सब बराबर के भागीदार होते हैं।”उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड की जनभावना साफ है—बेटी के साथ जिसने भी अपराध किया है, चाहे वह कितना ही बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, उसे सामने लाया जाना चाहिए।
पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर हो जांच
महापंचायत में यह भी मांग उठी कि पर्यावरणविद् अनिल जोशी की ओर से दर्ज कराई गई FIR के आधार पर नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार की शिकायत को आधार बनाकर जांच की जाए।वक्ताओं ने कहा कि जब तक पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा। मंच से यह संकल्प लिया गया कि अंकिता भंडारी के इंसाफ की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।
अंकिता के पिता की मांग—तीनों आरोपियों और VIP की कॉल डिटेल निकाली जाए
अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने साफ शब्दों में कहा कि—
“तीनों आरोपियों की कॉल डिटेल निकाली जाए और जो VIP शामिल हैं, उनकी भी कॉल डिटेल सामने लाई जाए। हम कोई समझौता करने या बिकने वाले नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि जब तक सच पूरी तरह सामने नहीं आता, तब तक परिवार और जनता दोनों की लड़ाई जारी रहेगी।






