
दिल्ली : आबकारी नीति से जुड़े मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को विशेष न्यायाधीश जितेंद्र प्रताप सिंह ने आरोपमुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद न्यायाधीश सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं, क्योंकि वे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में अहम और सख्त फैसले दे चुके हैं।
न्यायाधीश जितेंद्र प्रताप सिंह का न्यायिक करियर निष्पक्षता, प्रक्रिया के पालन और ठोस साक्ष्यों पर आधारित निर्णयों के लिए जाना जाता है। आबकारी नीति मामले में उन्होंने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट कहा कि केवल गवाहों के बयानों या अनुमान आधारित कथाओं के आधार पर किसी व्यक्ति को मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बिना ठोस सामग्री के किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को साजिश का हिस्सा बताना कानून के शासन की मूल भावना के विपरीत है।
इससे पहले उन्होंने कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह से जुड़े एक मामले को फिर से खोलने का आदेश दिया था। मामला मशहूर चित्रकार एम.एफ. हुसैन की एक महंगी पेंटिंग से संबंधित था। आरोप था कि पूर्व सांसद डॉ. प्रभा ठाकुर से एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत की पेंटिंग उधार लेने के बाद उसे वापस नहीं किया गया। न्यायाधीश सिंह ने मजिस्ट्रेट द्वारा पहले खारिज की गई शिकायत को रद्द करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया यह आपराधिक विश्वासघात का मामला बनता है और इसकी दोबारा सुनवाई आवश्यक है।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा से जुड़े एक मामले में भी उनका रुख सख्त रहा। चुनावी भाषणों में कथित सांप्रदायिक बयानों को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘पाकिस्तान’ जैसे शब्दों का प्रयोग चुनावी ध्रुवीकरण और नफरत फैलाने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जो स्वीकार्य नहीं है।
इसी तरह वक्फ बोर्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में उन्होंने ‘आप’ विधायक अमानतुल्लाह खान को राहत दी थी। अदालत ने पाया कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दाखिल आरोपपत्र में उनके खिलाफ पर्याप्त और ठोस आधार नहीं थे, जिसके चलते उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया।
दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में विशेष न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जितेंद्र प्रताप सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी संघीय एजेंसियों द्वारा जांच किए जा रहे भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई कर चुके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने वाले सिंह को अक्टूबर 2024 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायिक हलकों में उन्हें ऐसे जज के रूप में देखा जाता है जो भारी-भरकम चार्जशीट से अधिक कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणिक साक्ष्यों को महत्व देते हैं।







