
बदायूं / सैदपुर : जनपद में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नगर पंचायत सैदपुर के वार्ड नंबर 01 में स्थित सरकारी जमीन पर कथित रूप से एक व्यक्ति द्वारा दुकान और भवन का निर्माण कर लिया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार यह निर्माण पूरी तरह अवैध था, जिस पर पहले भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इसके बावजूद आरोप है कि बाद में उसी भूमि का पट्टा अतिक्रमणकारी की पत्नी के नाम कर दिया गया, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायत में बताया गया है कि इस अवैध कब्जे को लेकर पहली बार 26 अक्टूबर 2013 को जिलाधिकारी बदायूं से शिकायत की गई थी। उस समय नगर प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते 31 मई 2014 को दोबारा शिकायत दर्ज करानी पड़ी। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए भवन को अतिक्रमण से मुक्त कराया था। लेकिन आरोप है कि बाद में नगर प्रशासन की मिलीभगत से 28 जनवरी 2015 को एक प्रस्ताव पास कर उक्त भवन का पट्टा अतिक्रमणकारी की पत्नी के नाम कर दिया गया, जो नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि किसी भी अतिक्रमणकारी या उसके परिवार के सदस्य के नाम पर सरकारी संपत्ति का पट्टा या आवंटन करना पूरी तरह अवैध है। इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया गया है कि यह कदम अवैध कब्जे को वैध बनाने की कोशिश है। साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसा कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अंतर्गत धोखाधड़ी की श्रेणी में आ सकता है और यदि किसी अधिकारी की इसमें संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
अब इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने एक बार फिर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि अतिक्रमणकारी की पत्नी के नाम किए गए पट्टे को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और अवैध रूप से बनाए गए भवन को ध्वस्त कर सरकारी भूमि को पूरी तरह मुक्त कराया जाए। इस मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है।







