
सैदपुर में चालीसवें की फातिहा, सुनहरी मस्जिद में हुआ रूहानी प्रोग्राम
मौलाना ततहीर रज़ा का बयान, वालिदेन की खिदमत पर दिया खास पैगाम
सैदपुर: बस्ती में एक धार्मिक और भावनात्मक माहौल उस समय देखने को मिला जब मौलाना मुमताज हैदर खान की वालिदा के चालीसवें की फातिहा के अवसर पर सुनहरी मस्जिद में एक दिवसीय प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस मौके पर दूर-दराज़ से आए उलेमा-ए-किराम और स्थानीय लोगों की बड़ी तादाद ने शिरकत की और मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत की गई।
प्रोग्राम का आगाज़ कुरआन पाक की तिलावत से हुआ, जिसके बाद नात-ओ-मनक़बत पेश की गई। इसके बाद हज़रत मौलाना ततहीर रज़ा साहब, बरेली ने अपना बयान फरमाते हुए औलाद और वाल्देन के रिश्ते की अहमियत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इस्लाम में मां-बाप का मुकाम बेहद बुलंद है और औलाद के ऊपर उनके हुकूक अदा करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वाल्देन की खिदमत करना न सिर्फ दुनिया में कामयाबी का जरिया है बल्कि आखिरत में भी बड़े अज्र और सवाब का कारण बनता है।
मौलाना साहब ने अपने बयान में यह भी कहा कि आज के दौर में जहां लोग दुनियावी दौलत और मशगूलियत में उलझे रहते हैं, वहीं उन्हें चाहिए कि अपने वाल्देन की खिदमत को प्राथमिकता दें और उनके हुकूक अदा करने में कोई कमी न रखें। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मां-बाप की छोटी-छोटी ख्वाहिशों को पूरा करना भी अल्लाह की रज़ा हासिल करने का जरिया बन सकता है।
इस मौके पर मुफ्ती शाने आलम उदयपुरी ने भी खिताब किया और मरहूमा के लिए दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह तआला उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके घरवालों को सब्र-ए-जमील अता करे। उन्होंने भी अपने बयान में औलाद को नसीहत दी कि वह अपने वाल्देन की इज्जत करें और उनकी खिदमत को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाएं।
यह प्रोग्राम मौलाना मुमताज हैदर खान की ज़ेरे सरपरस्ती में आयोजित किया गया, जिसमें इलाके के कई मशहूर उलेमा-ए-किराम और दीनदार शख्सियतों ने शिरकत की। इनमें मुफ्ती शाने आलम उदयपुरी, हाजी मोहम्मद स्वाले अली, हाफिज ताहिर हुसैन, हाफिज अकरम नूरी, हाफिज मोहम्मद हनीफ समेत कई अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने मिलकर मरहूमा के लिए ईसाल-ए-सवाब किया और उनके दर्जात बुलंद होने की दुआ मांगी।
प्रोग्राम के आखिर में सामूहिक दुआ का एहतिमाम किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हाथ उठाकर अल्लाह से मरहूमा की मगफिरत और उनके परिवार के लिए सब्र की दुआ की। पूरे माहौल में एक रूहानी सुकून और इबादत की फिजा देखने को मिली, जिसने हर शख्स को भावुक कर दिया।
रिपोर्ट: ज़ीशान सिद्दीकी, सैदपुर





