
लखनऊः अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया है कि मंदिर के चढ़ावे में आए करोड़ों रुपये गायब हो गए हैं। उन्होंने इस मामले में सरकार और मंदिर ट्रस्ट को घेरते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नियमित ऑडिट प्रक्रिया जारी है और अब तक कोई अनियमितता सामने नहीं आई है।
अखिलेश यादव ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि भगवान राम के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यह बेहद संवेदनशील खबर है कि राम मंदिर के चढ़ावे की बड़ी राशि गायब पाई गई है। उन्होंने इसे मंदिर ट्रस्ट के लिए शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने के लिए सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि मामला करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए अदालत को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि ट्रस्ट का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता रहता है, जिसमें ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। उन्होंने बताया कि ऑडिट की प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और फिलहाल भी यही कार्य जारी है। उनके अनुसार अभी तक किसी प्रकार की विशेष या चिंताजनक बात सामने नहीं आई है।
मंदिर ट्रस्ट के न्यासी और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने कोई गलत काम किया है तो भगवान राम स्वयं उसे दंड देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और अधिकारियों द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय ट्रस्ट को स्वीकार होगा। उनके अनुसार यदि कोई गलती या अनियमितता हुई है तो वह जांच में सामने आ जाएगी और दोषियों को उसके परिणाम भुगतने होंगे।
चंपत राय के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट दिखे अखिलेश यादव ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि दिया गया जवाब स्वयं स्पष्ट नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह ट्रस्ट के लिए कोई सामान्य बात हो और इसे उल्लेखनीय भी नहीं माना जा रहा हो। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और आंकड़ों के मिलान के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जब संदेह किसी एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है तो केवल एक व्यक्ति के स्पष्टीकरण का कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि स्पष्टीकरण आने में इतने घंटे क्यों लगे और जवाब इतना संक्षिप्त क्यों रखा गया। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की चुप्पी की तरह ट्रस्ट की सफाई भी संदेह पैदा करती है। उनके अनुसार इस पूरे मामले पर अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है ताकि श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।





