
देहरादून : उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने का सिलसिला जारी है। बारिश के कारण प्रदेश में एक राज्यमार्ग और मुख्य जिला मार्ग समेत कुल 80 मार्ग बंद हो गए हैं। सड़कें बंद होने से कई क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में जगह-जगह पहाड़ों से मलबा और बोल्डर सड़कों पर आ रहे हैं। इससे कई मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर सड़कें संकरी होने के कारण वाहनों की आवाजाही बेहद मुश्किल हो गई है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।
नैनीताल में सबसे अधिक 15 मार्ग बंद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में बारिश का असर देखने को मिल रहा है। नैनीताल जिले में सबसे अधिक 15 मार्ग बंद बताए गए हैं। इसके अलावा चमोली और पिथौरागढ़ में 13-13 मार्ग, जबकि रुद्रप्रयाग में 12 मार्ग प्रभावित हैं।
जिलेवार स्थिति की बात करें तो अल्मोड़ा में एक, बागेश्वर में नौ, चमोली में 13 और देहरादून में पांच मार्ग बंद हैं। वहीं नैनीताल में 15, पौड़ी में तीन, पिथौरागढ़ में 13, रुद्रप्रयाग में 12, टिहरी में छह और उत्तरकाशी में तीन मार्ग बंद बताए गए हैं।
इन मार्गों के बंद होने से कई गांवों और कस्बों का संपर्क प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने में परेशानी हो रही है। कई क्षेत्रों में लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मलबा और बोल्डर बने परेशानी का कारण
पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। पहाड़ों से गिरने वाला मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर सड़कों पर जमा हो जाने से यातायात बाधित हो रहा है। कई स्थानों पर बारिश के दौरान सड़क खोलने के कुछ ही समय बाद दोबारा मलबा आने की स्थिति भी बन रही है।
सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं और अन्य वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
सड़कें खोलने में जुटे विभाग
बंद मार्गों को यातायात के लिए खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से सड़कों पर जमा मलबा और बोल्डर हटाए जा रहे हैं। विभागों की प्राथमिकता प्रमुख मार्गों पर यातायात बहाल करना है।
हालांकि, लगातार बारिश के कारण राहत और सड़क खोलने के कार्य में भी कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। बारिश के बीच पहाड़ी ढलानों से दोबारा मलबा आने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सड़क खोलने वाली टीमों को भी बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।
संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सावधानी की अपील
बारिश और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर यात्रा करने की अपील की है। विशेष रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि मौसम खराब होने की स्थिति में लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें और बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें। वाहन चालकों से भी अपील की गई है कि पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाते समय विशेष सतर्कता बरतें और सड़क पर मलबा या बोल्डर दिखाई देने पर जोखिम न उठाएं।
लगातार बारिश से बढ़ सकती हैं चुनौतियां
मौसम के लगातार खराब बने रहने से आने वाले समय में सड़क बंद होने और भूस्खलन की घटनाओं की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने बंद मार्गों को जल्द से जल्द खोलने के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।
फिलहाल प्रदेश के विभिन्न जिलों में बंद 80 मार्गों को खोलने का काम जारी है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेकर ही यात्रा करें तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।






