
काठमांडू: नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। बाढ़ के चलते कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था ठप हो गई है, जबकि भारत के अलग-अलग राज्यों से नेपाल पहुंचे पर्यटकों और यात्रियों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल संपर्क से बाहर है। इसके अलावा केरल के 37 पर्यटक भी नेपाल में फंसे हुए हैं। स्थिति को देखते हुए पश्चिम बंगाल, कर्नाटक समेत कई राज्य अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं।
कोलकाता से रवाना हुआ 32 सदस्यीय दल 21 अगस्त को यात्रा पर निकला था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे दल रसुवागढ़ी पहुंचा था। यहां से उसे नेपाल-तिब्बत सीमा पार कर तिब्बत जाना था। दल के सदस्य इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी इलाके में अचानक बाढ़ आ गई। इसके बाद सभी सदस्यों से संपर्क टूट गया।
टूर एजेंसी के प्रतिनिधि दिव्य ज्योति बसु के अनुसार, दोनों टूर मैनेजर जयंत सान्याल और नृपेन सरकार के मोबाइल में रोमिंग सुविधा थी। उनसे आखिरी बार सुबह करीब 8 बजे बात हुई थी। इसी दौरान कुछ यात्रियों ने फेसबुक पर लाइव भी किया था। इसके बाद किसी से संपर्क नहीं हो सका। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने के साथ ही राहत दलों के लिए वहां पहुंचना भी बेहद मुश्किल बताया जा रहा है। टूर एजेंसी के मुताबिक, नेपाल में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की व्यवस्था देखने वाली एजेंसी ने प्रभावित इलाके में एक हेलीकॉप्टर भी भेजा है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने नेपाल में फंसे राज्य के पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, कामगारों और कारोबारियों की स्थिति पर नजर रखने की बात कही है। राज्य सरकार भारतीय दूतावास और नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है। चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के कुछ लोगों के भी नेपाल में फंसे या लापता होने की जानकारी सामने आई है। परिजनों की सहायता के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने 033-24793311 और 9147890181 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। कोलकाता पुलिस ने 18003455678 और व्हाट्सऐप नंबर 9874902880 भी जारी किया है।
केरल के कन्नूर जिले के पय्यानूर विधानसभा क्षेत्र के 37 लोग भी नेपाल में फंसे हुए हैं। पय्यानूर के विधायक वी. कुन्हीकृष्णन ने बताया कि सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन बाढ़ के कारण उनकी आगे की यात्रा रुक गई है और वे नेपाल से वापस नहीं लौट पा रहे हैं। विधायक ने सभी 37 लोगों के मौजूदा स्थान और फोन नंबर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के कार्यालय को उपलब्ध करा दिए हैं। सभी पर्यटकों से संपर्क होने और उनके परिवारों को जानकारी दिए जाने के कारण परिजनों से घबराने की अपील नहीं की गई है। केरल सरकार ने सहायता के लिए 9447111844 और 9737132147 नंबर जारी किए हैं।
कर्नाटक सरकार ने भी नेपाल और तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में फंसे राज्य के नागरिकों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग टूर ऑपरेटरों, परिजनों और प्रभावित लोगों से जरूरी जानकारी साझा करने को कह रहा है, ताकि केंद्र सरकार और भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय कर बचाव एवं सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की जा सके। कर्नाटक के लोग 1070 और 080-22253707 पर राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
नेपाल की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान, ओडिशा और सिक्किम समेत कई राज्यों ने भी अपने नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन जारी की हैं। उत्तर प्रदेश के लिए 1070, महाराष्ट्र के लिए 1070 और 9321587143, तेलंगाना के लिए 9871999044, 9949351270 और 9618597969 तथा ओडिशा के लिए 011-23012807, 7428135044 और 8527580245 नंबर जारी किए गए हैं। राजस्थान में 1070, 112, 0141-2851960, 0141-2385776, 0141-2385777, 0141-2227296, 0141-2927392 और 0141-2227603 पर संपर्क किया जा सकता है। सिक्किम सरकार ने 03592201145, 03592202461 और 03592202256 नंबर जारी किए हैं।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने भी प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके लगभग तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इसके बाद आशंका जताई गई कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील फटने की घटना हुई हो सकती है। अचानक आई बाढ़ से नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। सड़कें और पुल बह गए, घरों और वाहनों को नुकसान पहुंचा तथा कई क्षेत्रों का संपर्क टूट गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है। संचार और आवागमन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण प्रशासन के लिए वास्तविक स्थिति का आकलन करना चुनौती बना हुआ है।
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि उन्होंने बाहर निकलते समय ऊपर की ओर से धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार को तिमुरे बाजार की ओर तेजी से आते देखा। उनके मुताबिक, बाढ़ करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में दाखिल हुई और कुछ ही पलों में पूरा बाजार बह गया।






