
श्रीनगर/ देहरादून: गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में शुक्रवार को हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजे देर शाम घोषित कर दिए गए। सुबह से दोपहर तक चले मतदान के बाद शुरू हुई मतगणना में विभिन्न पदों पर प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अध्यक्ष पद पर जय हो ग्रुप के हिमांशु भंडारी ने शानदार जीत दर्ज करते हुए 3301 मत हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के भुवन चमोली को 1505 मतों के बड़े अंतर से हराया। भुवन चमोली को कुल 1796 मत प्राप्त हुए।
अध्यक्ष पद के परिणाम सामने आने के साथ ही परिसर में हिमांशु भंडारी के समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया। समर्थकों ने जीत की खुशी में नारेबाजी की और एक-दूसरे को बधाई दी। चुनाव परिणामों में इस बार छात्र संगठनों के बीच मुकाबले के साथ-साथ निर्दलीय और विभिन्न छात्र समूहों की सक्रियता भी नजर आई।
उपाध्यक्ष पद पर छात्रम संगठन के पुलकित अग्रवाल ने बाजी मारी। उन्हें कुल 2991 मत प्राप्त हुए, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रीति वर्मा को 2046 मत मिले। इस तरह पुलकित अग्रवाल ने 945 मतों के अंतर से जीत हासिल की। परिणाम घोषित होते ही उनके समर्थकों में भी खुशी की लहर दौड़ गई।
सचिव पद पर मुकाबला सबसे करीबी मुकाबलों में शामिल रहा। एनएसयूआई के मयंक बहुगुणा ने 2708 मत प्राप्त कर जीत अपने नाम की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी पंकज को 2375 मत मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच महज 333 मतों का अंतर रहा। नतीजे घोषित होने के बाद मयंक बहुगुणा के समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया।
सह-सचिव पद पर अमन कुनियाल विजयी रहे। उन्होंने 1694 मत हासिल किए, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निशा को 1652 मत प्राप्त हुए। इस पद पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अमन कुनियाल ने महज 42 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। कम अंतर से मिली इस जीत ने सह-सचिव पद के चुनाव को सबसे रोमांचक मुकाबलों में शामिल कर दिया।
कोषाध्यक्ष पद पर रामस्वरूप का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद पर आइसा के युवराज ने 2979 मत हासिल कर जीत दर्ज की। छात्रा प्रतिनिधि पद पर सुनिधि सिंह विजयी रहीं। उन्हें कुल 2105 मत प्राप्त हुए। अलग-अलग पदों पर परिणाम घोषित होने के साथ ही समर्थकों में उत्साह देखने को मिला।
बिड़ला परिसर में छात्रसंघ चुनाव के लिए शुक्रवार सुबह आठ बजे मतदान प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो दोपहर दो बजे तक चली। मतदान समाप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतपेटियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर मतगणना शुरू की गई। देर शाम तक अलग-अलग पदों के मतों की गिनती चलती रही और इसके बाद चुनाव परिणाम घोषित किए गए।
इस बार बिड़ला परिसर में कुल 8,776 मतदाता चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए पंजीकृत थे। इनमें से पांच हजार से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान के दौरान छात्रों के साथ छात्राओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। बताया गया कि छात्राओं की भागीदारी छात्रों की तुलना में अधिक रही, जिससे चुनाव में महिला मतदाताओं की सक्रियता भी प्रमुख रूप से सामने आई।
मतदान के दौरान परिसर के मुख्य गेट पर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की भीड़ जुटी रही। समर्थक लगातार नारेबाजी करते रहे, जिसके चलते बिड़ला परिसर के मुख्य गेट के बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। दिनभर कई बार एनएच पर लंबा जाम लगने की स्थिति बनी रही। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
डीएसपी अनुज कुमार और कोतवाल कुलदीप सिंह के नेतृत्व में परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिसकर्मियों ने मतदान से लेकर मतगणना और परिणाम घोषित होने तक सुरक्षा व्यवस्था संभाले रखी। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. एमसी सती ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी की गई है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार सुबह 11 बजे एसीएल हॉल में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान नवनिर्वाचित पदाधिकारी अपने पद की शपथ लेंगे।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब बिड़ला परिसर में छात्रसंघ की नई टीम के गठन को लेकर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सह-सचिव, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि और छात्रा प्रतिनिधि समेत विभिन्न पदों पर चुने गए पदाधिकारी जल्द ही छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी भूमिका संभालेंगे। चुनाव के दौरान सामने आए मुद्दों और छात्रों की अपेक्षाओं को देखते हुए नई छात्रसंघ टीम के सामने परिसर की विभिन्न समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष उठाने की चुनौती भी रहेगी।





