
सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में एसआईआर के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर आज सर्वोच्च न्यायालय में अहम सुनवाई होने जा रही है। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों की सुनवाई तय कर चुका है। केरल के मामलों की सुनवाई 2 दिसंबर को, तमिलनाडु की 4 दिसंबर को और पश्चिम बंगाल की सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित है। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल से सामने आया एक गंभीर तथ्य यह था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 23 बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) की मृत्यु हो चुकी है। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल चुनाव कार्यालय से 1 दिसंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। साथ ही राज्य चुनाव आयोगों और केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) दोनों को इस संबंध में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
तमिलनाडु और बंगाल की याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं और मनमानी बरती जा रही है, जो हजारों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं, और प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर बंगाल के कई राजनीतिक नेताओं द्वारा भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
पश्चिम बंगाल में यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक गर्मा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे चुनाव आयोग पर देरी करने और राज्य के विकास कार्यों को बाधित करने का आरोप लगाया है। कूचबिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एसआईआर की वजह से राज्य की पथश्री परियोजना सहित कई विकासात्मक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं। पथश्री परियोजना के तहत लगभग 20,000 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण का कार्य प्रस्तावित है, जिसे वह किसी भी स्थिति में रुकने नहीं देना चाहतीं। उन्होंने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि “विकास एक सतत प्रक्रिया है, इसे रुकने नहीं दिया जाएगा। कूचबिहार संवेदनशील इलाका है—शांति और विकास दोनों बनाए रखने होंगे।”
ममता बनर्जी ने यह स्वीकार किया कि बीएलओ और बीएलए पर कार्यभार बहुत अधिक है, लेकिन उनके अनुसार एसआईआर की संरचना ही ऐसी है जो विकास कार्यों को धीमा करने और व्यवधान पैदा करने का काम कर रही है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मतदाता सूची की समीक्षा के साथ-साथ विकास गतिविधियों को भी जारी रखें और शांति व्यवस्था पर किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ने दें।
सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई को पूरे देश की निगाहों से देखा जा रहा है। अदालत द्वारा चुनाव आयोग से मांगे गए जवाब और आगे दिए जाने वाले निर्देश मतदाता सूची के पुनरीक्षण तथा उसके भविष्य के स्वरूप पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे। राज्यों और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते टकराव के बीच यह सुनवाई चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर एक बड़े फैसले की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।





