
देहरादून : देहरादून से दूर स्थित विद्यालय में उस समय आत्मीयता और उल्लास का दृश्य देखने को मिला, जब जन्मदिन के गीतों के साथ परिसर खुशियों से गूंज उठा। जलते अलाव की गर्माहट, सजी हुई मेजों पर केक और मिठाइयां तथा पारंपरिक उत्तराखंडी वाद्य यंत्रों की लय पर गाए जा रहे मंगल गीतों ने माहौल को खास बना दिया।
यह आयोजन किसी साधारण व्यक्ति का नहीं, बल्कि उत्तराखंड सरकार के अपर सचिव एवं महानिदेशक सूचना, IAS बंशीधर तिवारी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किया गया था।दिनभर की शासकीय जिम्मेदारियों और देर शाम तक चली बैठकों के बाद जब बंशीधर तिवारी अपने परिवार के साथ विद्यालय परिसर पहुंचे, तो बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि वर्षों से निभाया जा रहा एक आत्मीय रिश्ता था, जिसे निभाने वे हर साल यहां पहुंचते हैं।
बच्चों के बीच जमीन पर बैठकर मनाया जन्मदिन
बंशीधर तिवारी ने न तो किसी तरह का भाषण दिया और न ही पद की कोई दूरी बनाए रखी। वे बच्चों के साथ जमीन पर बैठे, उनके साथ केक काटा और स्वयं भोजन परोसते नजर आए। पूरे परिवार के साथ उन्होंने बच्चों के संग समय बिताया, उनके सपनों, पढ़ाई और रुचियों के बारे में बातचीत की। यह संवाद सवाल-जवाब नहीं, बल्कि एक अभिभावक और बच्चों के बीच अपनत्व से भरी बातचीत थी।
सादगी, संवेदना और सम्मान का उदाहरण
बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान बच्चियों ने मंगल गीत गाए, ईश्वर की आराधना की और अपने हाथों से केक काटकर “हैप्पी बर्थडे अंकल” कहकर बंशीधर तिवारी को शुभकामनाएं दीं। इस दृश्य ने वहां मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों को भी भावुक कर दिया। पूरे परिसर में सादगी, सम्मान और मानवीय संवेदना की झलक साफ नजर आ रही थी।
वृक्षारोपण के साथ दिया भविष्य का संदेश
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। बंशीधर तिवारी ने इसे केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जैसे पौधा समय के साथ बड़ा होकर फल और छाया देता है, वैसे ही इन बालिकाओं को यदि सही शिक्षा, मार्गदर्शन और स्नेह मिले, तो वे समाज को नई दिशा देने वाली बन सकती हैं।
लक्ष्य तय करने और नेतृत्व की प्रेरणा
बच्चियों से अभिभावक की भूमिका में संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य तय करना बेहद जरूरी है। परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, आत्मविश्वास और ईमानदारी से रास्ते खुद बनते हैं। उन्होंने बच्चियों को केवल सफल होने तक सीमित न रहने, बल्कि नेतृत्व करने और दूसरों के लिए उदाहरण बनने की प्रेरणा दी।
IAS बंशीधर तिवारी और उनके परिवार की यह पहल समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि जीवन के खास पल यदि जरूरतमंद बच्चों के साथ साझा किए जाएं, तो वे केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रेरणा बन जाते हैं। यह आयोजन आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली के बीच मानवीय मूल्यों की एक सुंदर मिसाल बनकर सामने आया।





