
पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर कथित असंतोष और सांसदों के अलग गुट बनाने की अटकलों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता कीर्ति आज़ाद और सांसद कल्याण बनर्जी ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। दोनों नेताओं ने रिपोर्टों पर सवाल उठाते हुए BJP पर भ्रम फैलाने और राजनीतिक साजिश रचने का आरोप लगाया।
यह विवाद उन खबरों के बाद शुरू हुआ जिनमें दावा किया गया कि TMC के 20 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग समूह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि सांसदों के पास संख्या बल इतना है कि वे एक नया राजनीतिक गुट बनाने पर विचार कर सकते हैं।
कीर्ति आज़ाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कथित सूची को पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सूची BJP द्वारा फैलाई गई है और इसमें शामिल कई नेताओं ने किसी भी दस्तावेज़ या पत्र पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि BJP का “ऑपरेशन लोटस” विफल हो गया है और इस पूरी कहानी के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं।
दूसरी ओर, TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने भी कथित पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बीत जाने के बावजूद ऐसा कोई पत्र सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनका दावा है कि लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि उन्हें ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
कल्याण बनर्जी ने कुछ TMC नेताओं की BJP के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के साथ कथित मुलाकात का उल्लेख करते हुए पूछा कि ऐसी बैठक कैसे आयोजित हुई और इसके पीछे कौन लोग थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने की कोशिश करने वाले नेता अब ममता बनर्जी को अपना नेता नहीं मानते और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जाने का फैसला कर चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समूह TMC से अलग होने की कोशिश करता है तो उसे दलबदल विरोधी कानून के तहत कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार, संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से बचने के लिए ऐसे नेताओं को अंततः औपचारिक रूप से BJP में शामिल होना पड़ सकता है।
रिपोर्टों में जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनकी आलोचना करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव के दौरान यही नेता ममता बनर्जी की जमकर प्रशंसा करते थे, लेकिन अब दावा कर रहे हैं कि TMC में रहते हुए वे विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि वे वास्तव में BJP में जाना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर पार्टी में शामिल होना चाहिए, BJP के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए और जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि ऐसे नेताओं ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है और उन्हें अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर स्पष्टता दिखानी चाहिए, न कि परोक्ष रूप से राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए।






