
नई दिल्ली/धार : मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर में दोनों समुदायों को सीमित समय के भीतर धार्मिक गतिविधियां करने की अनुमति देते हुए संतुलन बनाए रखने का निर्देश दिया है।
शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार, इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति दी गई है। वहीं मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज अदा करने की छूट दी गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नमाज के लिए आने वाले लोगों की संख्या जिला प्रशासन को पूर्व में सूचित की जाएगी, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
कोर्ट ने जिला प्रशासन को सख्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें बसंत पंचमी के दिन पूजा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा वर्ष 2003 में जारी निर्देशों में उन परिस्थितियों का उल्लेख नहीं है, जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ते हैं। इसी अस्पष्टता के कारण हर वर्ष विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है।
भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। दोनों समुदायों की आस्थाओं के कारण यह मामला अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भोजशाला विवाद का प्रभाव केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी पड़ता है। यही कारण है कि हर बार बसंत पंचमी और शुक्रवार के संयोग पर प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।





