
तेहरान/वॉशिंगटन/नई दिल्ली : ईरान में तेजी से बिगड़ते हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अल उदैद एयर बेस से कुछ अमेरिकी कर्मियों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी गई है। वहीं भारत सरकार ने भी ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की अपील की है।
भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों को सतर्क रहने को कहा है और सलाह दी है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें तथा उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों के जरिए जल्द से जल्द भारत लौटने की योजना बनाएं। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
उधर अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयर बेस पर तैनात कुछ सैन्य कर्मियों को संभावित खतरे को देखते हुए एहतियातन हटाने का निर्णय लिया है। यह बेस मध्य-पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है, जहां करीब 10 हजार सैनिक तैनात हैं। माना जा रहा है कि यह कदम ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच उठाया गया है।
ईरान के भीतर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। आर्थिक संकट से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब सरकार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुके हैं। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। सरकार ने हालात पर नियंत्रण के लिए इंटरनेट और संचार सेवाओं पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं।
मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों को गिरफ्तार किया गया है। अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है और अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान देते हुए संकेत दिए हैं कि यदि ईरान में हिंसा नहीं रुकी तो अमेरिका सख्त कदम उठा सकता है। रूस ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान के मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह संकट अब केवल ईरान तक सीमित न रहकर पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।





